होटल सीज करने का नोटिस जारी करने पर बवाल, बीडीए में नोरबाजी, धरने पर बैठे लोग

रानी बाजार स्थित पूर्व पार्षद मनोज बिश्नोई का होटल सीज करने का नोटिस जारी होने पर बुधवार को बवाल मच गया। समर्थकों सहित बिश्नोई बीकानेर विकास प्राधिकरण पहुंचे, जहां जमकर नारेबाजी हुई। उसके बाद सचिव कक्ष के बाहर ही धरने पर बैठ गए। बार एसोसिएशन ने भी बीडीए आयुक्त को ज्ञापन देकर होटल सीज की कार्यवाही रोकने की मांग की है। खेजड़ी बचाओ आंदोलन से जुड़े प्रमुख लोगों की संपत्तियों की छानबीन करते हुए प्रशासन ने पूर्व पार्षद मनोज बिश्नोई का रानी बाजार स्थित होटल शौर्य 3.0 सीज करने का नोटिस जारी किया था। यह नोटिस उन्हें मंगलवार रात आठ बजे बाद मिला। उसके बाद महापड़ाव पर माहौल गर्मा गया। आंदोलनकारियों ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस कर जिला प्रशासन के इस हरकत को शर्मनाक बताते हुए उग्र होने की चेतावनी दे डाली। वहीं समर्थकों सहित बिश्नोई ने बीडीए में प्रदर्शन किया। बिश्नोई ने चेताया कि प्रशासन ने जबरन होटल सीज करने की कार्यवाही की तो परिवार सहित आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। इस दौरान पर्यावरण संघर्ष समिति की बीडीए प्रशासन से वार्ता हुई, जिसमें परसराम बिश्नोई, रामगोपाल बिश्नोई, महेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। इससे पूर्व पर्यावरण प्रेमी पब्लिक पार्क से पैदल मार्च कर बीडीए पहुंचे। अधिवक्ताओं ने द्वेषपूर्ण कार्यवाही बताया : बीकानेर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित के नेतृत्व में वकीलों के शिष्टमंडल ने बीडीए आयुक्त अपर्णा गुप्ता से मुलाकात कर इसे द्वेषतापूर्ण कार्यवाही बताया। उन्होंने कहा कि यदि होटल सीज किया तो आंदोलन किया जाएगा। रानीबाजार स्थित होटल शौर्य 3.0 बिल्डिंग बायलॉज के तहत नहीं बना, इसलिए बीडीए ने संचालक पूर्व पार्षद मनोज बिश्नोई को नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे हैं। दरअसल शहर में बड़ी संख्या में व्यापारिक प्रतिष्ठान बिल्डिंग बायलॉज के तहत नहीं हैं। उनमें सेटबैक नहीं छोड़ा हुआ। आवासीय भूमि का वाणिज्यिक उपयोग किया जा रहा है। भुट्टों का चौराहा, गंगाशहर, सादुल गंज, जयनारायण व्यास कॉलोनी, खतूरिया कॉलोनी, पवनपुरी, सादुल कॉलोनी, सुदर्शनानगर ऐसे प्रतिष्ठानों से भरा पड़ा है। अवैध रूप से अंडरग्राउंड बने हुए हैं। पिछले दिनों खतूरिया कॉलोनी में केएमआर होटल को सीज किया गया था। इसके अलावा लंबे समय से किसी प्रतिष्ठान पर कोर्ई कार्यवाही नहीं हुई। इसमें सबसे बड़ी गलती बीडीए की है। भवन निर्माण की अनुमति जारी करते समय निष्पक्ष रूप से निरीक्षण नहीं किया जाता। नक्शा कुछ और होता है निर्माण कुछ और।

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