जब अलग-अलग सेक्टर का अनुभव एक मंच पर जुड़ता है, तब नेतृत्व की असली पहचान बनती है। एनआरबी ग्रुप से जुड़े और डायरेक्टर के रूप में कार्यरत अनिल बागड़िया के लिए IIM इंदौर का उद्यम संवाद लीडरशिप प्रोग्राम एक महत्वपूर्ण सीख का अवसर बना। उनका समूह इन्फ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, एडटेक, आईटी और एग्रीटेक जैसे विविध क्षेत्रों में सक्रिय है। दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में देश के अलग-अलग सेक्टर से आए लीडर्स और अनुभवी मेंटर्स से संवाद के जरिए उन्होंने जाना कि एक अच्छा लीडर कैसे बनता है और निर्णय लेने की क्षमता कैसे मजबूत की जाती है। अनिल बागड़िया मानते हैं कि भविष्य के लीडर में तीन गुण अनिवार्य होने चाहिए—एडैप्टेबिलिटी, प्रभावी कम्युनिकेशन स्किल्स और पॉजिटिव एटीट्यूड के साथ प्रॉब्लम सॉल्विंग की क्षमता। साथ ही, एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज हर सेक्टर में प्रोसेस को आसान और अधिक प्रभावी बना रहे हैं। उनका संदेश साफ है—सीखने की कोई उम्र नहीं होती, मेहनत, धैर्य और निरंतर सीख ही सफलता का रास्ता है।


