भरतपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने बुधवार (11 फरवरी) को मोती महल में रियासतकालीन झंडा फहराया। उन्होंने 13 दिन पहले (29 जनवरी को) सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ऐलान किया था कि 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल की जयंती पर मोती महल जाकर रियासतकालीन झंडा फहराऊंगा। लेकिन 2 दिन पहले ही झंडा फहरा दिया। सोशल मीडिया पर झंडा फहराने का वीडियो पोस्ट करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने लिखा- महाराजा सूरजमलजी अमर रहें। लोहागढ़ रियायत का रियासतकालीन झंडा दोबारा फहरा दिया गया है। पूरी सरदारी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। मोती महल पर रियासतकालीन झंडे के 4 फोटो अपील की 12 फरवरी को निजी कार्य में व्यस्त झंडा फहराने का वीडियो शेयर करने के बाद पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने दो पोस्ट की। जिसमें लोगों से अपील की कि 12 फरवरी गुरुवार को निजी कार्यम में व्यस्त होने के कारण लोगों से मुलाकात नहीं कर पाऊंगा। इसलिए मुलाकात के लिए आने का कष्ट न करें। दूसरी पोस्ट में सूचना दी कि 13 फरवरी (शुक्रवार) को महाराजा सूरजमल की जयंती के अवसर पर ग्राम पास्ता (डीग) में महाराजा सूरजमल की मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में लोग शामिल हों। एक दिन पहले ही की थी बेटे अनिरुद्ध से मुलाकात विश्वेन्द्र सिंह ने मंगलवार को ही बेटे अनिरुद्ध सिंह के साथ एक फोटो शेयर की थी। करीब पांच साल पत्नी-बेटे से विवाद चल रहा था। फोटो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा था- ‘आज (10 फरवरी) जवाहर रिजॉर्ट में बहुत दिनों बाद मेरे बेटे युवराज अनिरुद्ध भरतपुर से सुखद मुलाकात हुई।’ अनिरुद्ध सिंह ने भी एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था- ‘मुझे कॉफी पीने का शौक है। पिताजी ने नई कॉफी मशीन खरीदी है। मैं कॉफी पीने चला गया।’ इस तस्वीर को पिता-पुत्र के बीच सुलह के तौर पर देखा जा रहा था। इसके बाद बुधवार को मोती महल पर रियासतकालीन झंडा फहराए जाने का वीडियो आया। 10 फरवरी की पोस्ट.. 29 जनवरी को किया था दावा-13 फरवरी को झंडा फहराऊंगा पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए 29 जनवरी को ऐलान किया था कि 13 फरवरी को मोती महल पर रियासतकालीन झंडा फहराऊंगा। भरतपुर राजपरिवार में पिछले 5 सालों से चला आ रहा पारिवारिक विवाद सुलझने के कगार पर ही था। मेरी पत्नी और बेटे ने भरतपुर का रियासतकालीन झंडा अभी तक नहीं लगाने के कारण यह विवाद फिर से उलझ गया है। या तो मेरी पत्नी और बेटा भरतपुर रियासत कालीन के झंडे को फिर से लगा दें। नहीं तो मैं खुद 13 फरवरी को झंडा फहराऊंगा। हालांकि रियासतकालीन झंडे की रस्सी और तार काट दिया गया है। तब भी झंडे को फहरा कर आऊंगा। किसी में हिम्मत है तो मुझे रोक के दिखा देना। क्या है झंडा विवाद, कैसे हुआ पटाक्षेप दरअसल पिछले 5-6 साल से विश्वेंद्र सिंह का पत्नी दिव्या सिंह और बेटे अनिरुद्ध सिंह से पूर्व राजपरिवार की प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर केस भी कराया था। मोती महल पर विश्वेंद्र सिंह अपनी प्रॉपर्टी होने का दावा करते हैं। करीब 5 महीने पहले यह बात सामने आई कि अनिरुद्ध ने मोती महल से रियासतकालीन झंडा हटाकर तिरंगा झंडा लगा दिया। इसके बाद मामला गर्म हो गया। इसके बाद 21 सितंबर 2025 को तीन युवकों ने मोती महल में घुसकर जबरन रियासतकालीन झंडा लगाने की कोशिश की। लेकिन झंडा फहराने में कामयाब नहीं हो सके। इस घटना के बाद हुई समाज पंचायत में विश्वेंद्र सिंह ने कहा था कि मैं बसंत पंचमी को मोती महल जाऊंगा। करीब पांच महीने चले झंडा विवाद का निपटारा बुधवार को विश्वेंद्र सिंह ने एक पोस्ट के जरिए किया। जिसमें उन्होंने मोती महल पर झंडा फहराते वीडियो शेयर किया। जबकि एक दिन पहले बेटे के साथ फोटो शेयर कर पारिवारिक विवाद भी खत्म होने का संकेत दिया।
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