झुंझुनूं में मजदूर संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों को ‘मजदूर विरोधी’ और ‘किसान विरोधी’ बताते हुए प्रदर्शन किया। संगठन एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला फूंक कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन की शुरुआत शहर के शिक्षक भवन से हुई, जहां बड़ी संख्या में मजदूर, किसान, विद्यार्थी और आशा सहयोगिनियां एकत्रित हुए। यहां से एक विशाल रैली निकाली गई जो शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुंची। रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने मजदूर एकता जिंदाबाद और व्यापारिक समझौते रद्द करो जैसे नारे लगाए। कलेक्ट्रेट पर सभा को संबोधित करते हुए प्रमुख किसान नेता महिपाल पूनियां ने कहा- केंद्र सरकार ने ट्रंप के साथ जो व्यापारिक समझौते किए हैं, वे पूरी तरह से किसान और मजदूर विरोधी हैं। देश के स्वाभिमान को ताक पर रखकर घुटनों के बल बैठकर किए गए इन समझौतों को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। सरकार मजदूरों के दशकों पुराने अधिकारों को खत्म कर उन्हें कॉरपोरेट का गुलाम बनाना चाहती है। देखें प्रदर्शन की तस्वीर… इन मांगों पर हुआ प्रदर्शन किसान संगठन: एमएसपी (MSP) को कानूनी अधिकार बनाने की मांग को लेकर डटे रहे। एसएफआई (SFI): यूजीसी के नियमों को सख्ती से लागू करने और छात्र हितों की रक्षा की मांग की। आशा सहयोगिनी: लंबे समय से उठ रही ‘राज्य कर्मचारी’ का दर्जा देने की मांग को प्रमुखता से उठाया। युवा शक्ति: बेरोजगारी और श्रम कानूनों में बदलाव के खिलाफ युवाओं ने हुंकार भरी। मजदूर अधिकार: श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को वापस लिया जाए और मजदूरों के छीने गए अधिकारों को बहाल किया जाए। एमएसपी की गारंटी: किसानों को उनकी फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का कानूनी अधिकार मिले। आशा सहयोगिनी: मानदेय के बजाय आशा सहयोगिनियों को नियमित कर राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। शिक्षा: उच्च शिक्षा में यूजीसी के मानकों को सही ढंग से लागू किया जाए। पुतला दहन के साथ प्रदर्शन का समापन कलेक्ट्रेट के घेराव के बाद प्रदर्शनकारियों ने मोदी और ट्रंप के पुतले को आग के हवाले किया। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया और मजदूर-किसान विरोधी नीतियों को बंद नहीं किया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।


