भारत-फ्रांस दूतावास, फ्रेंच इंस्टीट्यूट इन इंडिया और एलायंस फ्रांसेज नेटवर्क की ओर से आयोजित वॉल आर्ट फेस्टिवल के तहत महिला अधिकारों और जागरुकता का संदेश देने वाले म्यूरल्स (भित्तिचित्र) बनाए गए हैं। कलेक्ट्रेट और अजमेर क्लब के बाहर की दीवारों पर यह म्यूरल्स रीयूनियन आइलैंड की प्रमुख स्ट्रीट आर्टिस्ट और म्यूरलिस्ट डेय एमकेओ के साथ अलग-अलग संस्थाओं से जुड़े 30 कलाकारों ने बनाए हैं। एडीए कमिश्नर ने भी गुरुवार को वॉल पर पेंटिंग की गई हैं। डेय इससे पहले उदयपुर, जयपुर और जोबनेर में आकर्षक वॉल पेंटिंग्स बना चुकी हैं। वे अजमेर 14 फरवरी तक प्रवास करेंगी, इस दौरान शहर की दीवारों पर आकर्षक म्यूरल बनाएंगी। डेय की पेंटिंग्स मुख्य रूप से महिलाओं के अधिकारों लैंगिक समानता, नारी सशक्तीकरण और युवाओं की भागीदारी पर केंद्रित होती हैं। वे अपनी कला को एक मंच के रूप में इस्तेमाल करती हैं ताकि संवेदनशील इलाकों में महिलाओं की स्थिति पर आवाज उठा सकें और सामाजिक बदलाव ला सकें। उनकी शैली में जीवंत रंगों का प्रयोग, मजबूत संदेश वाले चित्र और लेटरिंग शामिल होता है, जो सार्वजनिक स्थानों पर प्रभावशाली म्यूरल्स के रूप में उभरता है। वे युवा लड़कियों और महिलाओं को प्रेरित करने करने के लिए साहस, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय थीम पर फोकस कर म्यूरल्स बनाती हैं। यहां बनाए जा रहे म्यूरल्स भी इसी थीम पर आधारित हैं। 20 वर्षों से ग्रैफिटी और स्ट्रीट आर्ट में सक्रिय समन्वयक सुरभि जैन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त आर्टिस्ट डेय अजमेर में महिला जन अधिकार समिति, लोक कला संस्थान, पृथ्वीराज फाउंडेशन और अन्य स्थानीय संगठनों के सहयोग से वे म्यूरल्स बनाने में जुटी हैं। 12 फरवरी को भी कलेक्ट्रेट के बाहर म्यूरल बनाए गए। मालूम हो कि डेय मिलिटेंट फेमिनिस्ट म्यूरलिस्ट के रूप में जानी जाती हैं। वे रीयूनियन आइलैंड की एक प्रमुख स्ट्रीट आर्टिस्ट और म्यूरलिस्ट हैं। वे पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से ग्रैफिटी और स्ट्रीट आर्ट में सक्रिय हैं और रीयूनियन द्वीप पर स्ट्रीट आर्ट दृश्य की प्रमुख हस्तियों में से एक हैं। मालूम हो कि इस उत्सव का ग्रैंड फिनाले 8 मार्च 2026 को बेंगलुरु में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर होगा। म्यूरल्स में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी डेय एमकेओ ने रीयूनियन आइलैंड पर कई म्यूरल्स बनाए हैं, जहां वे युवाओं और महिलाओं की स्थिति को उजागर करती हैं। वे एमकेओ एसोसिएशन की सह-संस्थापक हैं, जो महिलाओं को सशक्त बनाने और स्ट्रीट आर्ट के माध्यम से उनकी आवाज बुलंद करने पर काम करती है। उनकी कला न केवल सौंदर्यबोधक है, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर गहरी टिप्पणी करती है, जिससे वे द्वीप की स्ट्रीट आर्ट कम्युनिटी में प्रभावशाली बन गई हैं। महिला जन अधिकार समिति की सचिव इंद्रा पंचोली के अनुसार वॉल आर्ट भारत में स्ट्रीट आर्ट आंदोलन की तरह पॉपुलर हो रहा है। लोक कला संस्थान के निदेशक संजय कुमार सेठी ने कहा कि इस उत्सव में हमारे शहर के कलाकारों को हिस्सा लेने का अवसर मिला।


