पिछले 13 सालों से नहीं बढ़ी RTE की राशि:इसी ड्यूरेशन में विधयक-कलेक्टर की सैलरी 255% तक बढ़ी; प्राइवेट स्कूल करेंगे असहयोग आंदोलन

शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को पत्र भेजकर प्रतिपूर्ति राशि में बड़ा इजाफा करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर असहयोग आंदोलन की चेतावनी भी दी है। यानी RTE के तहत प्रवेश पाने वाले स्टूडेंट्स का एडमिशन प्रभावित हो सकता है। एसोसिएशन ने बताया कि RTE के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि पिछले 13 वर्षों से नहीं बढ़ाई गई। जबकि इसी अवधि में विधायकों की सैलरी 255%, IAS अधिकारियों की सैलरी 136%, राज्य और केन्द्र के ग्रेड 1 कर्मचारियों की सैलरी क्रमश: 158 और 136% तक बढ़ी है। हाईकोर्ट ने 6 महीने में निर्णय लेने के दिए थे आदेश पूरे मामले को लेकर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए HC बिलासपुर ने 19 सितंबर 2025 को अंतिम आदेश पारित किया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को 6 माह के भीतर एसोसिएशन की मांगों पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की यह है मांग एसोसिएशन ने मंत्री को भेजे पत्र में मांग की है कि प्राथमिक कक्षाओं में प्रतिपूर्ति राशि ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रति विद्यार्थी/वर्ष, माध्यमिक कक्षाओं में ₹11,500 से बढ़ाकर ₹22,000 और हाई व हायर सेकेंडरी में अधिकतम सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 किया जाए। साथ ही बढ़ी हुई राशि पिछले 3 वर्षों से एरियर सहित दिए जाने की भी मांग की गई है। 13 साल में सैलरी बढ़ी, लेकिन शिक्षा बजट जस का तस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बीते 13 वर्षों में विधायकों की इन-हैंड सैलरी ₹45,000 से बढ़कर ₹1.60 लाख हो गई। आईएएस अधिकारियों की एंट्री लेवल सैलरी ₹45,000 से बढ़कर ₹1.06 लाख से अधिक हो गई। राज्य और केंद्र सरकार के ग्रेड-1 अधिकारियों के वेतन में भी दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई इसके बावजूद गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले खर्च के लिए दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। असहयोग आंदोलन की चेतावनी एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन असहयोग आंदोलन करने पर मजबूर होगी। संगठन का कहना है कि यह न केवल शिक्षा के अधिकार कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि हाईकोर्ट के आदेश की भी अनदेखी है।

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