प्रदेश में हाईवे पर बने 2216 अवैध निर्माण होंगे ध्वस्त:हाईकोर्ट ने कहा- धर्म, व्यापार या आवास के नाम पर सुरक्षा से समझौता नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ जोधपुर ने प्रदेश के नेशनल हाईवे की सुरक्षा और आमजन के जीवन के अधिकार को लेकर एक सख्त और दूरगामी फैसला सुनाया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने ‘हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राजस्थान राज्य’ जनहित याचिका में रिपोर्टेबल जजमेंट दिया है। इसमें कोर्ट ने कहा है कि प्रदेश के नेशनल हाईवे पर ‘राइट ऑफ वे’ के भीतर आने वाले सभी 2216 अतिक्रमणों को अगले दो महीने में हटाया या स्थानांतरित किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार का अवरोध ‘संवैधानिक गलती’ है। दुर्घटना ने खोला अवैध निर्माणों का काला चिट्ठा यह पूरा मामला जोधपुर के चौखा सुलिया बेरा निवासी हिम्मत सिंह गहलोत द्वारा दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ। कोर्ट ने अपने आदेश में 22 जनवरी 2026 की एक दुखद घटना का जिक्र किया, जहाँ एक धर्मकांटे (वेब्रिज) के पास अवैध कट और अतिक्रमण के कारण हुई दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने माना कि यह हादसा केवल एक संयोग नहीं, बल्कि हाईवे सुरक्षा मानकों के खुले उल्लंघन का प्रत्यक्ष परिणाम था। हाईवे के भीतर क्या है ‘निषिद्ध क्षेत्र’? एनएचएआई के वकील अंकुर माथुर ने कोर्ट को तकनीकी मानकों से अवगत कराया। इसके अनुसार हाईवे की केंद्र रेखा से दोनों ओर दूरियां इस प्रकार निर्धारित हैं: रोड लैंड बाउंड्री/बिल्डिंग लाइन: केंद्र रेखा से दोनों ओर लगभग 40 मीटर (कुल चौड़ाई 80 मीटर)। इस क्षेत्र में कोई निर्माण अनुमति योग्य नहीं है। कंट्रोल लाइन: केंद्र रेखा से दोनों ओर लगभग 75 मीटर (कुल चौड़ाई 150 मीटर)। यहाँ केवल विशेष वैधानिक अनुमति से ही विनियमित निर्माण संभव है। राइट ऑफ वे (ROW): यह वह परिचालन गलियारा है जिसमें कैरिजवे, ड्रेन और सुरक्षा मार्जिन शामिल होते हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि राइट ऑफ वे के भीतर का हर अतिक्रमण अवैध है और उसे हटाना अनिवार्य है। प्रदेश भर में अतिक्रमण का चौंकाने वाला विवरण अदालत के सामने पेश किए गए आंकड़ों ने हाईवे पर सुरक्षा की पोल खोल दी है। राजस्थान में नेशनल हाईवे पर कुल 2,216 व्यवस्थित अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं: धार्मिक संरचनाएं: 103 (मंदिर, मस्जिद, आदि) आवासीय निर्माण: 881 व्यावसायिक संरचनाएं: 1,232 (होटल, ढाबे, धर्मकांटे) सर्वाधिक अतिक्रमण वाले जिले: भरतपुर (337), धोलपुर (353), दौसा (320), जयपुर (275), और पाली (163) जिलों में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक पाई गई है। धार्मिक संरचनाओं पर कोर्ट का रुख अदालत ने साफ कर दिया कि ‘राइट ऑफ वे’ के भीतर आने वाली किसी भी संरचना को केवल इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता कि वह धार्मिक है। सुप्रीम कोर्ट के 2009 के एक आदेश का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों या फुटपाथों पर मंदिरों, मस्जिदों या गुरुद्वारों को बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासनिक तालमेल नहीं, विभागों को सख्त चेतावनी कोर्ट ने पाया कि माइनिंग, बिजली, जल और स्थानीय निकाय विभाग अक्सर एनएचएआई की अनुमति के बिना ही लाइसेंस या कनेक्शन दे देते हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि: कोई भी विभाग एनएचएआई/पीडब्ल्यू की पूर्व स्वीकृति के बिना हाईवे सुरक्षा क्षेत्र में एनओसी या कनेक्शन जारी नहीं करेगा। अगले 15 दिनों के भीतर मौजूदा सभी एनओसी की समीक्षा की जाएगी और उल्लंघन मिलने पर उन्हें निलंबित किया जाएगा। हर जिले में ‘डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स’ का गठन किया जाएगा। सड़क दुर्घटनाओं के डरावने आंकड़े कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय की 2023 की रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसके अनुसार देश में 1.72 लाख से अधिक मौतें सड़क हादसों में हुईं। चौंकाने वाली बात यह है कि नेशनल हाईवे कुल सड़कों का मात्र 2% हैं, लेकिन 30% मौतें इन्हीं पर होती हैं। कोर्ट ने कहा कि यह आर्थिक उत्पादकता वाले 18-45 आयु वर्ग का नुकसान है, जो देश की जीडीपी पर 3% का बोझ डालता है। अंतिम निर्देश और स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दो महीने के भीतर जीआईएस मैपिंग और फोटोग्राफिक सबूतों के साथ जिलेवार स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। अधिकारियों को आगाह किया गया है कि यदि दोबारा अतिक्रमण हुआ, तो उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *