स्ट्रॉबेरी की मिठास ​लोकल के साथ रायपुर-बिलासपुर तक, रोज 200 किलो सप्लाई

भास्कर न्यूज | जशपुरनगर जशपुर जिले की जलवायु अब स्ट्रॉबेरी उत्पादन के लिए वरदान साबित हो रही है। पिछले एक साल में स्ट्रॉबेरी का रकबा 42 एकड़ से बढ़कर 150 एकड़ तक पहुंच गया है। इस वर्ष दिसंबर में ओलावृष्टि के बावजूद स्ट्रॉबेरी की फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। वर्तमान में खेतों में फल पूरी तरह तैयार हैं। मांग के अनुरूप जशपुर से स्ट्रॉबेरी रायपुर और बिलासपुर भी भेजी जा रही है। बेहतर गुणवत्ता और ताजगी के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग बनी हुई है, इसलिए 100 रुपए प्रति पैकेट से अच्छी आमदनी मिल रही। बीते वर्ष 33 किसानों ने 42 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती की थी, जबकि इस साल 60 से अधिक किसान इस फसल से जुड़े हैं। किसानों ने बताया कि धान की फसल से 1 एकड़ से करीब 1 लाख तक की ही कमाई हो पाती थी, जबकि स्ट्रॉबेरी से 3 लाख तक का मुनाफा हो रहा है। बता दें ग्राम लरंगा, बंधुटोली और कोपा में कई किसानों ने पहली बार स्ट्रॉबेरी उत्पादन शुरू किया है। वर्ष 2025 में सन्ना और पंडरापाठ क्षेत्र के 208 किसानों ने इस खेती को अपनाया। जिले में स्ट्रॉबेरी उत्पादन की शुरुआत वर्ष 2018 में बगीचा विकासखंड के ग्राम सन्त्रा में 2 एकड़ में प्रयोग के तौर पर की गई थी। इसके बाद पांच गांवों में विस्तार हुआ। अनुकूल जलवायु और बेहतर उत्पादन को देखते हुए 22 सितंबर 2023 को नाबार्ड की एफएसपीएफ योजना के तहत रीड्स संस्था द्वारा छह गांवों के 25 किसानों को पौधे वितरित किए गए। ग्राम सन्ना, अकरीकाना, लोरो, कोपा, लरंगा और मैना में प्रत्येक किसान ने दो-दो हजार पौधे लगाए। पहले ही साल उच्च गुणवत्ता की स्ट्रॉबेरी मिलने से किसानों का उत्साह बढ़ा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विपणन और प्रसंस्करण की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाए तो जशपुर की स्ट्रॉबेरी प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना सकती है। फिलहाल किसानों को इस फसल से अच्छी आय मिल रही है और वे पारंपरिक खेती से हटकर उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। उद्यान विभाग ने भी वर्ष 2024 से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग देना शुरू किया। वर्तमान में किसान रीड्स संस्था की देखरेख में वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर रहे हैं। 25 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में इसका उत्पादन बेहतर होता है। जशपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में नवंबर से जनवरी तक तापमान सामान्यतः 25 डिग्री से कम रहता है। इस वर्ष दिसंबर में अधिकांश दिनों में तापमान 5 डिग्री या उससे कम रहा, जिससे फल की गुणवत्ता बेहतर हुई हैं।

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