भास्कर न्यूज | जालंधर फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष के 11वें दिन विजया एकादशी व्रत होता है। जो इस बार 13 फरवरी दिन शुक्रवार को है। ये व्रत सबसे पहले भगवान राम ने किया था। विजया एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस एकादशी का नाम विजया एकादशी है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से सभी काम पूरे होते हैं। दुश्मनों पर भी जीत मिलती है। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर कमल विहार बस्ती पीरदाद रोड के पं. गौतम भार्गव ने बताया कि यह एकादशी सौभाग्य देने वाली, सब पापों को नष्ट करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली है। इस व्रत के बारे में शास्त्रों में बताया जाता है कि संपूर्ण विधि-विधान से यह व्रत करने और पूजा करने से उपासक को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है और सभी पापों का नाश होता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर नहाना चाहिए। फिर उगते सूरज को अर्घ्य देने के बाद एकादशी व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद मंदिर में जाकर भगवान विष्णु के दर्शन करने चाहिए। तुलसी और पीपल के पेड़ में जल चढ़ाकर परिक्रमा करें। घी का दीपक जलाएं। यह है महत्व : विजया एकादशी को लेकर मान्यता है कि इस व्रत को रखने से व्यक्ति को सर्वत्र विजय मिलती है, हर शुभ कार्य पूर्ण होता है। लंका विजय करने की कामना से बकदाल्भ्य मुनि के आज्ञानुसार समुद्र के तट पर भगवान राम ने इसी एकादशी का व्रत किया था। जिसके प्रभाव से रावण का वध हुआ और भगवान रामचंद्र की विजय हुई। मान्यता है कि इस एकादशी के प्रभाव से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है,सभी कार्य अपने ही अनुकूल होने लगते हैं। यह व्रत करने से स्वर्ण दान, भूमि दान, अन्न दान और गौ दान से अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और अंततः प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह भी मान्यता है कि इस महान पुण्यदायक व्रत को करने से व्रती को वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पूजा विधि : सुबह भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। गोपी चंदन और हल्दी का तिलक लगाएं। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। भाव के साथ आरती का पाठ करें। अंत में शंखनाद करें। व्रत का पारण सात्विक भोजन से करें।


