मन यदि सुस्त हो तो कर्म भी सुस्त हो जाते हैं, मन को साधने वाला व्यक्ति होता है सफल

भास्कर न्यूज | जालंधर माघ महीने का कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सर्वप्रथम पंडित सत्य प्रकाश शास्त्री एवं पंडित बुद्धदेव वेदालंकार ने विधिवत यज्ञ संपन्न करवाया और उपस्थित संगत से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां डलवाईं। मुख्य यजमान के रूप में नीलू खन्ना, यज्ञ खन्ना, यम्या खन्ना, कमलेश नागरथ, आशु दीवान, कमलेश सेठी, मनीषा खन्ना, पूनम सेठी और प्रोमिला सिंगला उपस्थित रहे। इसके उपरांत पंडित बुद्धदेव वेदालंकार ने अपनी मधुर वाणी में भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आचार्य अंकित प्रभाकर ने रात्रि में सोते समय बोले जाने वाले मंत्रों का अर्थ समझाते हुए कहा कि मन जागते और सोते दोनों अवस्थाओं में दूर तक चिंतन करता है। उन्होंने बताया कि मन सभी ज्ञानेंद्रियों का प्रधान प्रेरक है और ईश्वर कृपा से इसे शुभ विचारों वाला बनाना चाहिए। स्वामी जी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर आदतों के वशीभूत होकर जीता है, जबकि मन स्वयं गलत नहीं करवाता, बल्कि हमारी प्रवृत्तियां हमें भ्रमित करती हैं। उन्होंने कहा कि सोते समय भी इंद्रियां सक्रिय रहती हैं और मन की कल्पनाशक्ति बढ़ जाती है। मन यदि सुस्त हो तो कर्म भी सुस्त हो जाते हैं। इसलिए नए विचार अपनाएं, पुरानी आदतों से दूरी बनाएं और मन को साधने का प्रयास करें। भगवान कृष्ण के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मन को साधने वाला व्यक्ति अवश्य सफल होता है। इस अवसर पर रश्मि घई, बीना शर्मा, नीरू कपूर, मधु सेठ, संजू भाटिया, अरविंद घई, जोगिंदर भंडारी, सुषमा चोपड़ा, मधु शर्मा, विभा आर्य, ज्योति शर्मा, किरण मारवाह, सुदेश वर्मा, रमा नागपाल, कामिनी कपूर और अंजू बाला व अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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