आंसुओं में डूबी रात के बाद, बेटी ने चुना साहस का सवेरा

शहर की एक 21 साल की फार्मेसी छात्रा की आपबीती ने रिश्तों की बुनियाद पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पिता की उंगली पकड़कर उसने चलना सीखा, उसी के खिलाफ उसे कानून का दरवाजा खटखटाना पड़ा। परिवार के अन्य सदस्य बाहर थे और वह घर में अकेली थी। उसी दौरान रात उसके साथ शराब के नशे में धुत पिता ने ही दुष्कर्म किया। उसने विरोध किया, खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज दबा दी गई। उस रात उसके भीतर सिर्फ डर नहीं टूटा, भरोसा भी टूट गया। घटना के बाद पूरी रात वह जागती रही। दीवारें, कमरा, घर सब उसे अजनबी लगने लगे। उसके मन में बार-बार एक ही सवाल उठ रहा था, क्या वह अब भी चुप रहे? पहले भी जब उसके पिता ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी, तब उसने हिम्मत जुटाकर घरवालों को बताया था, लेकिन उसकी बात सुनने के बजाय उसे ही चुप रहने को कह दिया गया। चुप्पी तोड़ बेटी ने न्याय मांगा आंसुओं में डूबी रात के बाद, उसने साहस का सवेरा चुना। अगले दिन वह कॉलेज गई, जहां दोस्तों के सामने उसका साहस आंसुओं में बदल गया। दोस्तों ने उसे संभाला, यकीन दिलाया कि गलती उसकी नहीं है। उसी हौसले के साथ उसने महिला हेल्पलाइन पर कॉल किया। सूचना मिलते ही पुलिस कॉलेज पहुंची। महिला अधिकारी की मौजूदगी में उसका बयान दर्ज किया गया। संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। विशेष रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जा चुकी है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। यह कहानी दर्द की है, लेकिन उससे भी ज्यादा हिम्मत की है। इस बेटी ने वह कदम उठा लिया है,अब समाज की जिम्मेदारी है, वह उसके साथ खड़ा रहे और न्याय की राह को मजबूत करे। मैं नहीं झुकूंगी, इंसाफ तक डटी रहूंगी इंसाफ की उम्मीद “मैं आज हॉस्टल के कमरे में बैठी हूं, लेकिन पहली बार खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हूं। घर से निकलते समय मेरे कदम कांप रहे थे, लेकिन दिल में एक ही फैसला था, अब वापस नहीं जाऊंगी, क्योंकि जिस घर को सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, वही मेरे लिए सबसे खौफनाक याद बन चुका है। जिस सच को बोलने में कई लड़कियां उम्र गुजार देती हैं, वह सच मैंने कह दिया। मेरे अपने पिता ने मेरे भरोसे को तोड़ा, मेरी मासूमियत को कुचला। मैंने मां को पहले भी बताया था। अगर तब मेरी बात सुन ली जाती, तो शायद यह सब नहीं होता। पर मैं कब तक चुप रहती? फैसला लिया, लेकिन मम्मी और भाई कॉलेज लेने आ गए, तो मेरा दिल फिर डर से भर गया, लेकिन इस बार मैंने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। मैंने साफ कह दिया, मैं वापस नहीं जाऊंगी। मुझे इंसाफ चाहिए। मैं किसी दबाव में नहीं आऊंगी। अगर आज मैं झुक गई, तो मेरी आवाज हमेशा के लिए दब जाएगी। परिवार का साथ नहीं मिला। बड़ी बहन से भी उम्मीद थी, पर उसने भी दूरी बना ली। यह दर्द अलग है लेकिन मैं अकेली नहीं हूं। मेरा कॉलेज, मेरे दोस्त मेरे साथ खड़े हैं। उन्होंने एहसास कराया कि खून का रिश्ता ही सब कुछ नहीं होता, साथ देने वाला ही अपना होता है। मैंने तय किया, अब अपनी जिंदगी खुद बनाऊंगी। पढ़ाई जारी रखूंगी, पार्ट टाइम जॉब करूंगी और अपने पैरों पर खड़ी होऊंगी। मैंने कुछ गलत नहीं किया। मैं खुद को संभालने की कोशिश कर रही हूं। मैं हार नहीं मानूंगी। मेरी लड़ाई सिर्फ अपने लिए नहीं है उन सभी लड़कियों के लिए है जो डर, शर्म और दबाव में चुप रह जाती हैं। मैं कहना चाहती हूं, अगर आपके साथ कुछ गलत हो, तो चुप मत रहो। परिवार न सुने तो किसी भरोसेमंद से बात करो। आज मेरा परिवार साथ नहीं है, अब मैं पीछे नहीं हटूंगी। मुझे इंसाफ चाहिए, और मैं उसे लेकर रहूंगी।”-जैसा पीड़िता ने बताया

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