भास्कर न्यूज | लुधियाना सभी ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर बुलाए भारत बंद का असर एक साथ प्रदर्शन किए जाने के चलते व्यापक तौर पर देखने को मिला। पीआरटीसी, मिड्डे मील वर्कर, बैंक कर्मी और आंगनबाड़ी वर्कर ने संयुक्त रूप से बुधवार को हड़ताल की। बैंककर्मियों ने भारत नगर चौक पर प्रदर्शन किया। जबकि आंगनबाड़ी वर्करों और पीआरटीसी मुलाजिमों ने बस स्टैंड पर प्रदर्शन किया। साथ ही सभी ने बस स्टैंड पर एकत्र होकर विशाल रैली निकाली। इस रैली में एटक, इंटक, सीटू, एक्टू, सीटीयू पंजाब, एसकेएम सहित विभिन्न संगठनों और स्वतंत्र फेडरेशनों ने भाग लिया। हड़ताल के चलते बुधवार शाम से ही पीआरटीसी की सभी बसें बस स्टैंड पर खड़ी कर दी गई थी। जो वीरवार शाम 3 बजे धरने के बाद शुरू की गई। इस रोष प्रदर्शन के कारण प्राइवेट बसों में यात्रियों की भीड़ नजर आई। वहीं बैंकों में मिला जुला असर रहा और कुछ बैकों में कैशियर हड़ताल पर रहे। जिससे लेन देन प्रभावित हुआ। जबकि मिड्डेमील वर्करों ने स्कूलों में खाना नहीं बनाया। बस स्टैंड पर रैली में शामिल वक्ताओं ने कहा कि नए लेबर कोड बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना, संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा किए बिना और भारतीय लेबर कॉन्फ्रेंस बुलाए बिना लागू किए गए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का उल्लंघन है, जिन पर भारत हस्ताक्षर कर चुका है। नेताओं ने ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट 2025’ को रद्द करने, मनरेगा कानून को कमियां दूर कर पुनः लागू करने, मसौदा सीड बिल और बिजली संशोधन बिल वापस लेने की मांग की। रैली को कामरेड चंद्र शेखर, मंगत राम पासला, डीपी मौर, गुरजीत सिंह जगपाल, अध्यक्ष मंडल में कामरेड केवल सिंह बनवैट, सरबजीत सिंह सरहाली मौजूद रहे। भारत नगर चौक पर वीरवार सुबह केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन और बैंक एम्प्लॉयज फेडरेशन ऑफ इंडिया,पंजाब बैंक एम्प्लॉयज फेडरेशन की तरफ से रैली का आयोजन किया गया। रैली को कॉमरेड पीआर मेहता उपाध्यक्ष एआईबीईए और महासचिव पंजाब बैंक एम्प्लॉयज फेडरेशन डॉ. राजिंदर पाल सिंह औलख, वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता कॉमरेड नरेश गौड़ ने संबोधित किया। कॉमरेड पीआर मेहता,महासचिव पंजाब बैंक एम्प्लॉयज फेडरेशन ने कहा कि नए श्रम संहिताएं (लेबर कोड्स) मेहनतकश वर्ग द्वारा वर्षों के संघर्ष से हासिल किए गए अधिकारों पर सीधा हमला हैं। डॉ. राजिंदर पाल सिंह औलख, वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता, ने कहा कि जब यूनियनों की हड़ताल करना कठिन बना दिया जाएगा, तब नियोक्ताओं को श्रम अधिकारियों की अनुमति के बिना तालाबंदी (लॉक-आउट) करने और छंटनी करने की खुली छूट मिल जाएगी। कॉमरेड नरेश गौड़ ने कहा कि श्रम संहिताएं मजदूरों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा की कीमत पर बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं। मिड डे मील वर्करों ने डीसी ऑफिस में किया प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपा: मिड-डे मील वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर डीसी आफिस में प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। वर्करों ने बताया गया कि मिड-डे मील वर्करों को वर्तमान में मात्र 3000 रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। जो बेहद कम है। उन्होंने मांग की है कि उनका वेतन कम से कम 10 हजार रुपये किया जाए या फिर हरियाणा पैटर्न के अनुसार 7500 रुपये मासिक दिया जाए। वर्करों ने यह भी मांग रखी कि उन्हें साल में दो बार वर्दी दी जाए। इसके अलावा उनसे अतिरिक्त कार्य न लिया जाए और केवल निर्धारित कार्य ही करवाया जाए। वर्करों ने यह भी मांग की कि काम पूरा होने के बाद उन्हें स्कूल में बैठाए रखने की बजाय छुट्टी दी जाए। हड़ताल के चलते स्कूलों में उन्होंने खाना नहीं बनवाया। वहीं टीचर्स ने स्कूलों में खुद या बाहर से व्यवस्था कर मिड्डे मील बनवाया।


