रांची नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे चुनावी पारा चढ़ता जा रहा है। इस बार के चुनाव में पुरुषों से अधिक नारी शक्ति का दम दिख रहा है। शहर के 53 वार्डों में कुल 364 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 228 महिलाएं शामिल हैं। यानी कुल उम्मीदवारों में करीब 62 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है। यह आंकड़ा अपने आप में नगर निकाय राजनीति की बदलती तस्वीर बयां करता है। दैनिक भास्कर द्वारा महिला प्रत्याशियों के नामांकन पत्र के साथ जमा शपथपत्रों के विश्लेषण में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है। 228 महिला प्रत्याशियों में से 139 महिलाओं की घोषित संपत्ति उनके पतियों से अधिक है। यानी करीब 61 प्रतिशत महिला प्रत्याशी आर्थिक रूप से अपने जीवनसाथी से आगे हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ चुनावी परिदृश्य, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी देता है। संपत्ति पर नजर डालें तो 9 महिला प्रत्याशी करोड़पति हैं, जबकि 133 लखपति हैं। 55 प्रत्याशियों के पास 1 हजार से 99 हजार रुपये तक की संपत्ति दर्ज है। वहीं 22 प्रत्याशी ऐसी हैं, जिनके शपथपत्र के अनुसार न तो बैंक बैलेंस है, न नगदी और न ही किसी प्रकार का वाहन। इसके अलावा 3 महिला प्रत्याशी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले घर में निवास करती हैं। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि इस बार नगर निगम चुनाव में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से भी वे मजबूत स्थिति में हैं। आधी आबादी का यह बढ़ता आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण स्थानीय राजनीति में नई दिशा और नई ऊर्जा का संकेत दे रहा है। अब देखना यह है कि यह बढ़त चुनावी नतीजों में किस रूप में सामने आती है। इंश्योरेंस के मामले में महिलाएं पीछे, पति महोदय आगे महिलाओं द्वारा दिए गए शपथपत्र का आकलन करने पर एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। करीब 55% महिलाएं ऐसी हैं जिनके नाम इंश्योरेंस नहीं है। जबकि, 45% महिला प्रत्याशी ऐसी हैं जिनके नाम 50 हजार से 5 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस हैं। हालांकि, उनके जिन महिलाओं के नाम इंश्योरेंस नहीं है उनमें से अधिकतर के पतियों के नाम पर 1 से 10 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस है। 90 प्रतिशत महिला प्रत्याशियों के पास सोना-चांदी महिला प्रत्याशियों की संपत्ति की कीमत पिछले एक साल में तेजी से बढ़ी है। सबसे बड़ी बात है कि महिला प्रत्याशियों की नगदी में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। अधिकतर प्रत्याशियों के पास नगदी के रूप में 10 हजार से एक लाख रुपए के बीच ही है। लेकिन उनके बैंक और निवेश में अच्छी-खासी रकम है। लेकिन दौलत में बढ़ोत्तरी की सबसे बड़ी वजह सोना और जमीन-मकान है। 90 प्रतिशत महिला प्रत्याशियों के पास सोना-चांदी है। एक साल पहले 10 ग्राम सोना की कीमत 75 हजार रुपए थी, जो अब बढ़कर 1.50 लाख रुपए प्रति दस ग्राम हो गई है। मतलब सोना की कीमत दोगुनी हो गई। वहीं, अधिकतर महिलाओं के नाम घर-जमीन है। हाल के वर्षों में घर-जमीन की कीमत में भी बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। इस वजह से भी महिलाओं की दौलत में इजाफा हुआ है। इसके अलावा निवेश करने में महिलाएं अपने पतियों से आगे हैं।


