सूरजकुंड मेले में मिथिला पेंटिंग आकर्षण का केंद्र:पटना के कलाकार दंपती संभाल रहे हैं विरासत, दादी को मिल चुका पद्मश्री पुरस्कार

फरीदाबाद के अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में इस बार मिथिला पेंटिंग की खास प्रस्तुति देखने को मिल रही है। बिहार के पटना से आए मशहूर कलाकार राजकुमार लाल और उनकी पत्नी विभा लाल 10 साल बाद एक बार फिर मेले में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। दोनों अपने परिवार की कला विरासत को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। राजकुमार लाल ने बताया कि यह कला अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रही है। वे 2008 में थाईलैंड और 2018 में मॉरीशस में कार्यशालाएं आयोजित कर चुके हैं। वे दिल्ली और कोलकाता समेत कई शहरों में प्रशिक्षण भी देते हैं। रामायण पर आधारित उनकी पेंटिंग अयोध्या के शोध संस्थान में संरक्षित की गई है। जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सम्मानित कर चुके हैं। सूरजकुंड मेले में दर्शकों को उनकी कलाकृतियां खास तौर पर पसंद आ रही हैं। दादी को मिल चुका है पद्मश्री राजकुमार की दादी जगदंबा देवी को 1970 में राष्ट्रीय पुरस्कार और 1975 में देश का पहला पद्मश्री पुरस्कार मिला था। उनकी मां यशोदा देवी को राज्य पुरस्कार और विभा लाल को 2019 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। प्राकृतिक रंगों का करते हैं प्रयोग पति पत्नी को मधुबनी पेंटिंग के नाम से प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग में महारथ हासिल है। इसकी विशेषता है कि इसमें केवल प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है। हरे रंग के लिए पत्तों का पाउडर और अन्य रंगों के लिए हल्दी, गुलाब, चमेली और गुड़हल जैसे फूलों का उपयोग किया जाता है और बिना किसी प्रारंभिक स्केच के सीधे रंगों से कलाकृतियां बनाई जाती है। मिथिला पेंटिंग की खास बातें

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