भास्कर न्यूज | जालंधर अप्रैल महीने की शुरुआत के साथ ही पंजाब के स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र का आगाज होने जा रहा है। जिसकी हलचल जालंधर के सरकारी स्कूलों में अभी से दिखाई देने लगी है। नए सत्र के लिए अभिभावक और छात्र स्कूलों में काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के प्रमुख सरकारी स्कूलों में रोजाना औसतन दस से बारह अभिभावक और बच्चे एडमिशन प्रोसेस की बारीकियों को जानने के लिए आ रहे हैं। इस दौरान छात्रों और अभिभावकों के मन में भविष्य को लेकर कई सवाल हैं, जैसे कि किस स्ट्रीम का चुनाव करना उनके करियर के लिए अधिक फायदेमंद रहेगा, दाखिले की प्रक्रिया क्या होगी और क्या उनकी पसंद की स्ट्रीम संबंधित स्कूल में उपलब्ध है या नहीं। छात्र विशेष रूप से स्कूलों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में जानकारी लेने में रुचि दिखा रहे हैं। इस समय पंजाब सरकार की ओर से विशेष दाखिला मुहिम की शुरुआत की गई है। इसके तहत सरकारी स्कूलों के शिक्षक और विभाग के कर्मचारी कड़ी मेहनत कर रहे हैं और घर-घर जाकर बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस अभियान के दौरान शिक्षकों की ओर से इलाके के बच्चों का विवरण लिया जा रहा है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। शिक्षक अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं, जैसे कि पौष्टिक मिड-डे मील और अन्य सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इस मुहिम को और प्रभावी बनाने के लिए स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक मिलनी का आयोजन भी किया जा चुका है, जिससे स्कूलों और समुदायों के बीच एक मजबूत कड़ी स्थापित हो सके। सरकारी स्कूलों के क्लासरूम में भी स्मार्ट और टच स्क्रीन बोर्ड उपलब्ध आज के समय में जालंधर के प्रमुख सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इन स्कूलों में छात्रों के लिए अंग्रेजी, बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स और गणित की आधुनिक लैब स्थापित की गई हैं, जहां थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ क्लासरूम में स्मार्ट बोर्ड और टच स्क्रीन बोर्ड जैसी तकनीक उपलब्ध है।इसके अलावा, पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्कूल ऑफ एमिनेंस के तहत एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर मेधावी छात्रों को दाखिला दिया जा रहा है। इन स्कूलों में नौवीं कक्षा के लिए 36 सीटें और ग्यारहवीं कक्षा में आर्ट्स, मेडिकल, नॉन-मेडिकल व कॉमर्स की 32-32 सीटें निर्धारित हैं, जिनमें कुछ सीटें आरक्षित भी रखी गई हैं।


