बदहाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम:मेन रोड पर सिटी बस व अंदरूनी इलाकों में ऑटो, राइट्स का ये सुझाव लागू नहीं

राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर राइट्स कंपनी ने वर्ष 2012 में एक सर्वे किया था। यह सर्वे आने वाले 30 साल को ध्यान में रखकर किया गया था और रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट में शहर के हर इलाके में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सुझाव दिया गया था। सुझाव था कि मुख्य सड़कें जैसे जीई रोड, एमजी रोड, जेल रोड, शंकर नगर और तेलीबांधा इलाके में मोनो रेल चलाई जाए। इन सड़कों से जुड़े शांति नगर, दलदल सिवनी, गुढियारी, समता कॉलोनी और अश्वनी नगर इलाकों में सिटी बस चलाई जाए। बाकी इलाके और कॉलोनियों में ऑटो व ई-रिक्शा संचालित किए जाएं। इससे हर इलाका पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़ जाएगा और लोग निजी वाहनों का कम उपयोग करेंगे। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस व आरटीओ ने ऑटो के रूट को लेकर प्रस्ताव तैयार किया था। पिछले साल ट्रैफिक पुलिस ने सर्वे कर शहर को चार जोन में बांटकर ऑटो व ई-रिक्शा चलाने का प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा था, लेकिन यह लागू नहीं हुआ और प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यही वजह है कि शहर के अधिकांश इलाकों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है। लगातार भीड़ बढ़ रही, ​इसलिए शहर को 4 जोन में बांटने का प्रस्ताव पिछले साल ट्रैफिक पुलिस ने प्रस्ताव तैयार किया था कि शहर में ऑटो व ई-रिक्शा की संख्या बढ़ रही है, लेकिन ये कुछ ही रूटों पर चल रही हैं। सबसे ज्यादा पंडरी से विधानसभा, रेलवे स्टेशन से घड़ी चौक, शास्त्री चौक से टिकरापारा, भाठागांव और तेलीबांधा रूट पर संचालित हो रही हैं। शहर की 80 फीसदी सड़कों पर ये नहीं चल रही हैं। इसलिए शहर को चार जोन में बांटने का प्रस्ताव दिया गया था। हर जोन में ऑटो-ई रिक्शा की संख्या तय कर रूट व स्टॉपेज निर्धारित किए जाएं। इससे सभी इलाकों में ऑटो-रिक्शा उपलब्ध रहेंगे। दूसरे जोन में जाने के लिए अनुमति लेनी होगी या सवारी को दूसरे ऑटो में शिफ्ट करना होगा। इससे शहर में जाम की स्थिति कम होगी। यह प्रस्ताव कलेक्टर के पास लंबित है और अब पुलिस कमिश्नर के पास भेजा गया है। इन इलाकों में ऑटो चलाने का था सुझाव
सर्वे में देवेंद्र नगर, गुढियारी, पुरानी बस्ती, अवंति विहार, खम्हारडीह, सड्डू, शैलेंद्र नगर, शंकरनगर, शांतिनगर, चंगोराभाठा, ईदगाहभाठा, डीडी नगर, कबीरनगर, आमानाका व अन्य इलाकों में ऑटो- ई-रिक्शा चलाने का सुझाव दिया गया है। ये मुख्य सड़कों से कनेक्ट रहेंगे। ई-रिक्शा को भी जारी किया जाए परमिट
पुलिस ने कई बार आरटीओ को प्रस्ताव भेजा है कि ई-रिक्शा का बिना टैक्स लिए परमिट जारी किया जाए, ताकि इनके संचालन का रूट तय हो सके। साथ ही किसी एक रूट पर अधिक और दूसरे पर कम संख्या न रहे। यह प्रस्ताव भी आरटीओ में लंबित है। रायपुर में चलाई जा सकती है मोनो रेल
राइट्स कंपनी के सर्वे रिपोर्ट के अनुसार रायपुर में मोनो रेल चलाई जा सकती है। इसका केंद्र बिंदु जयस्तंभ या शास्त्री चौक हो सकता है। यहां से टाटीबंध, तेलीबांधा-मंदिर हसौद, विधानसभा जीरो प्वाइंट, देवपुरी-कमल विहार और भनपुरी-धनेली तक इसे चलाया जा सकता है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। लोग ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करेंगे। इससे ईंधन और पैसों की बचत होगी।
तर्क: बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट समेत इन सड़कों पर चलें सिटी बस
इसी तरह राइट्स ने बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, भाठागांव रोड, टिकरापारा, वीआईपी स्टेट, दलदल सिवनी, गुढियारी, गोंदवारा, समता कॉलोनी, रायपुरा, लाखेनगर, टैगोर नगर, अवंति विहार, कचना, पिरदा व कचना इलाकों में छोटी सिटी बस चलाने का सुझाव दिया था। इसके अलावा खरोरा, आरंग, पाटन, कुम्हारी, उरला, धरसींवा और नवा रायपुर इलाके से इंटरसिटी बस चलाई जा सकती है।

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