ट्रेड यूनियन, आशा वर्करों को प्रदर्शन से रोका, देश भगत यादगार हॉल के बाहर सड़क पर दिया धरना

जालंधर| सीटी ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस में वैलेंटाइन वीक के मौके पर विशेष कार्यक्रम ‘दौर-ए-मोहब्बत’ आयोजित किया। इस कार्यक्रम में लेखिका व गायिका रूप कौर ने सूफियाना गायकी, शायरी और विचारों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान ‘अकीदा’ और ‘मिराकी’ को मंच पर सुनाया। इस अवसर पर सीटी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. मनबीर सिंह, डायरेक्टर स्टूडेंट वेलफेयर दविंदर सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. अर्जन सिंह सहित संस्थानों के प्रमुख उपस्थित रहे। भास्कर न्यूज | जालंधर ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर देशव्यापी आम हड़ताल के तहत जिले में भी हड़ताल की गई। हालांकि हड़ताल को लेकर बाजार बंद नहीं हुए और सड़कों पर भी ट्रैफिक जारी रहा, सिर्फ अलग-अलग यूनियनों की तरफ से श्रम संहिताएं रद्द कर पुराने श्रम कानून बहाल करने, मिड-डे मील, आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्करों सहित कच्चे कर्मचारियों को पक्का कर्मचारी दर्जा देने, न्यूनतम वेतन 26 हजार प्रति माह, बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज बिल 2025 रद्द करने, ‘विकसित भारत’ योजना रद्द कर मनरेगा कानून को पुनः बहाल करने, सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने तथा भारत–अमेरिका व्यापार समझौता रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। जिसमें देश भगत यादगार हाल में बड़ी संख्या में ट्रेड यूनियन वर्कर, मिड-डे मील वर्कर, आशा वर्कर, ग्रामीण व खेत मजदूर, कर्मचारी, पेंशनर और किसान शामिल हुए। रैली के बाद संगठनों ने देश भगत यादगार हाल से प्रेस क्लब चौक तक प्रदर्शन करने का ऐलान किया। लेकिन उन्हें देश भगत यादगार हाल के बाहर भारी पुलिस बल की तरफ से वाहनों और बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक लिया गया। जिसके विरोध में प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीच ही धरना लगा दिया और नारेबाजी की। इस मौके पर नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि शहर में मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर में ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के तहत लोगों की मुश्किलों को सुनने पहुंचे थे लेकिन जब लोग अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर मिलने की कोशिश की तो मुख्यमंत्री ने ना तो उनकी समस्याएं सुनना जरूरी समझा और ना ही उनसे मिलना। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूर हितैषी 29 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 श्रम संहिताएं लागू की हैं। केंद्र सरकार ने इन चारों श्रम संहिताओं को 1 अप्रैल से लागू करने का ऐलान किया है। इनके लागू होने से मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा और प्राप्ति के लिए यूनियन बनाने व संघर्ष करने का लोकतांत्रिक अधिकार समाप्त हो जाएगा। स्थायी नौकरी की जगह “फिक्स्ड टर्म इम्प्लॉयमेंट” लागू होगा, जिससे नौकरी की सुरक्षा खत्म हो जाएगी। मजदूरों पर शर्तें थोपकर कई कर्मचारियों को “मजदूर” मानने से ही इनकार कर दिया जाएगा। मजदूरी बढ़ाने के बजाय काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिए जाएंगे। 22 को मंत्रियों, विधायकों और भाजपा नेताओं के घरों के सामने प्रदर्शन होंगे यूनियन ने ऐलान किया कि 22 फरवरी को राज्य सरकार के मंत्रियों, विधायकों और भाजपा नेताओं के घरों के सामने धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे। इस मौके पर संघर्ष को और तेज व व्यापक करने का ऐलान करते हुए दो घंटे बाद धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। इस मौके पर डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन के प्रदेश नेता हरिंदर दोसांझ, मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन पंजाब के कुलविंदर, पेंशनर एसोसिएशन के बलविंदर कुमार, ग्रामीण मजदूर यूनियन पंजाब के प्रदेश प्रेस सचिव कश्मीर सिंह घुग्घशोर, देहाती मजदूर सभा के प्रदेश नेता बलदेव सिंह नूरपुरी, पंजाब खेत मजदूर यूनियन के हरमेश मालड़ी, पंजाब खेत मजदूर सभा के वीर कुमार, डेमोक्रेटिक आशा वर्कर व फेसिलिटेटर यूनियन पंजाब की अमृतपाल कौर, ज्योति, इस्त्री जागृति मंच की जसवीर कौर जस्सी मौजूद थे।

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