संविधान का ये कैसा सम्मान:पन्ने जर्जर, पत्थर के टुकड़े डाल रखे, ड्रोन से देखा तो सामने आई हकीकत

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) के प्रशासनिक भवन के सामने बने संविधान पार्क में जिस संविधान स्तंभ को विश्वविद्यालय के स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है, उसकी असली तस्वीर ड्रोन ने आज उजागर की है। नीचे से देखने पर गणतंत्र स्तंभ के ऊपर हाथों में थामी गई पत्थर की ‘संविधान पुस्तक’ बेहद आकर्षक और गरिमामय नजर आती है। लेकिन जब भास्कर की टीम ने इसे ड्रोन कैमरे की नजर से देखा, तो नजारा चौंकाने वाला था। पत्थर की यह किताब न सिर्फ कोरी है, बल्कि जर्जर अवस्था में है। किताब के पन्नों पर संविधान की कोई इबारत नहीं लिखी है। पत्थर के स्लैब कई जगह से उखड़े हुए और टूटी-फूटी अवस्था में हैं। ऐसा लगा जैसे बनाते समय इस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया हो। 2023 में हुआ था उद्घाटन, 1 करोड़ हुए खर्च संविधान पार्क का लोकार्पण वर्ष 2022 में हुआ था। 2023 में तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने इसका उद्धाटन किया था। इस प्रोजेक्ट पर करीब 1 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च हुई थी। पार्क के केंद्र में गणतंत्र स्तंभ स्थापित है, जिस पर हाथों में संविधान की किताब को दर्शाया गया है। पार्क में संविधान निर्माण की प्रक्रिया, संविधान सभा के सदस्य और प्रमुख अनुच्छेदों को शिलालेखों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

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