जिला मुख्यालय से करीब 48 किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे 325 पर छप्पन की पहाड़ियों की तलहटी में बसा मोकलसर गांव इतिहास, आस्था व सामाजिक सहयोग की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता है। इस गांव की स्थापना रावत मोकलजी जेतमलोत राठौड़ ने की थी। प्राचीन काल से ही मोकलसर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत व ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता रहा है। गांव में स्थित पग बावड़ी, प्राचीन जैन मंदिर, अनेक छतरियां और मंदिर यहां की गौरवशाली परंपरा के साक्षी हैं। ये धरोहरें न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को जीवित रखे हुए हैं, बल्कि पर्यटकों व श्रद्धालुओं को भी अपनी ओर आकर्षित करती हैं। मोकलसर के अधिकांश परिवार आज भी खेती-बाड़ी और पशुपालन पर निर्भर हैं। बरसाती सीजन के बाद रबी की फसल में यहां के किसान मुख्य रूप से गेहूं, जीरा व अरंडी की बुवाई करते हैं। मेहनतकश किसान आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक खेती को अपनाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। इसके साथ ही कई पशुपालक मवेशी पालन कर दूध उत्पादन के माध्यम से अपनी जीविका अर्जित कर रहे हैं। मोकलसर की पहचान भामाशाहों की नगरी के रूप में भी स्थापित है। गांव के भामाशाहों ने वर्षों से पेयजल, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गांव में विभिन्न विकास कार्यों में आज भी छोटे-बड़े स्तर पर भामाशाहों का सहयोग निरंतर जारी है। सामाजिक सरोकार व सहयोग की यह परंपरा मोकलसर को विशेष पहचान दिलाती है। नेशनल हाइवे 325 पर स्थित होने के कारण मोकलसर आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां से प्रतिदिन दर्जनों बसें अहमदाबाद, सूरत, वापी, मुंबई सहित गुजरात और अन्य राज्यों के लिए संचालित होती हैं। गांव के कई परिवार व्यापार व नौकरी के सिलसिले में अन्य राज्यों में स्थापित हैं। मोकलसर पहाड़ियों के मध्य स्थित मां चामुंडा माता मंदिर व खेतलाजी का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। प्रतिवर्ष सैकड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और जात लगाते हैं। रंगपंचमी के अवसर पर यहां मेले का आयोजन होता है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं और धार्मिक आस्था के साथ मेले का आनंद उठाते हैं। मोकलसर के युवा शिक्षा, खेल, चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या :8027
साक्षरता दर : 52.10 %
जिला मुख्यालय से दूरी : 48 किमी
कनेक्टिविटी : सड़क से जुड़ा है
पहचान : चामुंडा माता मंदिर


