RGPV:हर निर्माण में गड़बड़ी, 88 करोड़ का हिसाब ही नहीं मिल रहा

निर्माण अधूरा, एजेंसी 8 करोड़ और मांग रही आर्थिक गड़बड़ियों के लिए बदनाम हो चुके राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में एक और घोटाला सामने आया है। विवि में 2008-09 से 2023-24 के बीच हुए निर्माण कार्यों में जो भुगतान किए गए, उनमें से 88.78 करोड़ की राशि का हिसाब ही नहीं मिल रहा है। ये मामला खुला कैसे, इसकी कहानी भी दिलचस्प है। हाल में विवि के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में करीब 7 करोड़ की गड़बड़ी का मामला खुला। इसकी छानबीन में पता चला कि पिछले 16 सालों के दौरान हुए निर्माण कार्यो में 88.78 करोड़ का हिसाब गायब है। दरअसल, विवि का निर्माण कार्यों के लिए सीपीए (अब पीडब्ल्यूडी) के साथ अनुबंध है। विवि की लेखा शाखा में टेली रिकाॅर्ड के अनुसार 2008-09 से 2023-24 तक निर्माण कार्यों के लिए सीपीए को 290.12 करोड़ का एडवांस भुगतान किया था। सीपीए द्वारा इस राशि के विरुद्ध जमा किए गए बिलों के अंतर्गत एडजस्टेड राशि 201.33 करोड़ रुपए है। शेष राशि का अब तक एडजस्टमेंट नहीं हो सका है। सवाल ये भी है कि विवि ने 290.12 करोड़ के एडवांस पेमेंट से पहले भौतिक सत्यापन नहीं किया। सीपीए द्वारा निर्मित भवन का उपयोगिता प्रमाण-पत्र विवि को उपलब्ध नहीं कराया गया, न अन्य जरूरी दस्तावेज दिए। अब रजिस्ट्रार ने सभी दस्तावेज मांगे हैं। विवि ने सीपीए से काम कराए और 290.12 करोड़ का एडवांस भुगतान किया, जबकि सीपीए ने 201.33 करोड़ के ही बिल दिए प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ी 15 साल में भी पूरा नहीं कर सके ऑडिटोरियम करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी 2010 में शुुरू हुआ ऑडिटोरियम का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। इससे इसकी प्रोजेक्ट कॉस्ट 14 करोड़ से बढ़कर 33.86 करोड़ रुपए हो गई। इसके बाद भी निर्माण एजेंसी कहती है कि पूरा भुगतान न होने से निर्माण कार्य अधूरा है। पिछले 16 साल में आरजीपीवी में 20 से ज्यादा निर्माण कार्य हुए। दस्तावेजों के अनुसार 19 कार्यों का लेखा-जोखा मिला। इनमें से 6 कार्यों की शुरुआती प्रोजेक्ट कॉस्ट में बढ़ोतरी भी हुई। हैरत की बात यह है कि आरजीपीवी के तत्कालील अधिकारियों ने कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं की- कि वास्तविक खर्च कितना हुआ। यह जानकारी सीपीए ने भी कभी साझा नहीं की। वित्तीय नियमों के अनुसार नहीं हैं बिल ^सीपीए ने निर्माण कार्यों का आज तक समायोजन नहीं कराया है। जो बिल लगाए हैं, वे भी वित्तीय नियमों के अनुसार नहीं हैं। विवि द्वारा भुगतान और सीपीए द्वारा दिए गए बिलों के बीच का अंतर करीब 89 करोड़ का है। इसके बाद भी ऑडिटोरियम पूरा करने के लिए 8 करोड़ मांग रहे हैं, जो समझ से परे है।-डॉ. मोहन सेन, रजिस्ट्रार, आरजीपीवी कार्यों के सर्टिफिकेट दोबारा दे देंगे ^आरजीपीवी को पहले भी यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट दिए गए हैं। हो सकता है, अब वो सर्टिफिकेट उन्हें मिल नहीं रहे हों। इस संबंध में चर्चा हुई है। आरजीपीवी से अब तक मिली राशि से जो भी कार्य हुए हैं, उन सभी के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट दोबारा दिए जाएंगे। इसको लेकर जरूरी कार्यवाही की जा रही है। -संजय मस्के, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी

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