राजस्व विभाग ने प्रदेश में खेजड़ी की अवैध कटाई रोकने के आदेश सभी कलेक्टरों को जारी किए हैं। इसके साथ ही खेजड़ी बचाओ आंदोलन को लेकर 11 दिन से चल रहा महापड़ाव स्थगित कर दिया गया। गुरुवार देर रात मंच से इसकी घोषणा की गई। राजस्व विभाग के शासन सचिव डॉ. जोगाराम ने सभी जिला कलेक्टरों को आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि खेजड़ी के संरक्षण के लिए विशेष कानून इसी विधानसभा सत्र में लाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है। प्रदेश में खेजड़ी के संरक्षण एवं अवैध कटाई नहीं होने देने के लिए सरकार पूर्णत: संकल्पित है। इसे देखते हुए सचिव ने कलेक्टरों को प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उद्योग मंत्री केके बिश्नोई ने खेजड़ी कटाई पर रोक लगाने की अधिकृत रूप से घोषणा करते हुए राजस्व विभाग का पत्र मंच से दिखाया तो पर्यावरण प्रेमियों ने मां अमृता देवी के जयकारे लगाए। उद्योग मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा, खेजड़ी पर कड़ा कानून लाने की सहमति 27 अगस्त को ही बन गई थी। सभी संभागीय आयुक्त और कलेक्टर्स को खेजड़ी के संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपते हुए निर्देशित किया है कि कानून लागू होने तक खेजड़ी की अवैध रूप से कटाई न हो। इससे पहले राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल के रूप में मंत्री केके बिश्नोई सहित जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत सिंह बिश्नोई, विधायक पब्बाराम और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई रात करीब साढ़े नौ बजे महापड़ाव पर पहुंचे। संत, पर्यावरण संघर्ष समिति के सदस्य और आंदोलन की कोर कमेटी को पहले आदेश दिखाया। उसकी भाषा को लेकर विचार-विमर्श किया। रात करीब 11.15 बजे उन्होंने मंच से घोषणा कर दी। आंदोलन स्थगित होने पर प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। दरअसल 17 फरवरी को मुकाम मेले को देखते हुए प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि संतों ने मेले के बाद सभी से महापड़ाव पर पहुंचने का ऐलान कर दिया था। संत भागीरथ शास्त्री बोले- कानून में कमी रही तो फिर से महापड़ाव खेजड़ी की अवैध कटाई को लेकर राजस्व विभाग के आदेश और उद्योग मंत्री की घोषणा को लेकर संत भागीरथदास शास्त्री ने घोषणा की है कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, स्थगित किया गया है। यदि कानून में कमी रही तो वापस महापड़ाव पर बैठ जाएंगे। पर्यावरण संघर्ष समिति के प्रवक्ता रवि बिश्नोई ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण करना समाज के डीएनए में है। इस आंदोलन ने यह साबित कर दिखाया है। कब क्या-क्या हुआ
} 2 फरवरी : पॉलिटेक्निक कॉलेज में विशाल जनसभा के साथ महापड़ाव शुरू हो गया। हजारों की संख्या में पर्यावरण प्रेमी देशभर से पहुंचे। पेड़ बचाने के लिए यह भीड़ ऐतिहासिक थी।
} 3 फरवरी : 29 संतों सहित 363 पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठ गए।
} 4 फरवरी : आमरण अनशन पर बैठने वालों की संख्या 537 तक पहुंच गई। महापड़ाव स्थल पर ही अस्थायी अस्पताल बनाया गया।
} 5 फरवरी : संसद और विधानसभा में गूंजी खेजड़ी के संरक्षण की आवाज। मुख्यमंत्री का संदेश लेकर सरकार का प्रतिनिधिमंडल महापड़ाव पर पहुंचा। इस पर आमरण अनशन खत्म कर दिया गया।
} 6 फरवरी : पूरे प्रदेश में खेजड़ी की कटाई पर रोक की मांग को लेकर अड़े पर्यावरण प्रेमी क्रमिक अनशन पर बैठ गए।
} 8 फरवरी : संतों का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में सीएम से मिला।
} 9 फरवरी : महापड़ाव जारी रखने की घोषणा।
} 10 फरवरी : शहर में कलश यात्रा निकाली गई।
} 11 फरवरी : संतों ने मांग पूरी होने पर महापड़ाव स्थगित करने का शपथ-पत्र दिया और मौन जुलूस निकाला।
} 12 फरवरी : मांग पूरी होने पर आंदोलन स्थगित हो गया। खेजड़ी बचाओ आंदोलन से तीन बड़े बदलाव
} पर्यावरण के प्रति चेतना जागी, लोग एकजुट हुए
} देश, दुनिया को खेजड़ी के महत्व का पता चला
} शांतिपूर्ण आंदोलन से बिश्नोई समाज के प्रति सकारात्मक संदेश गया “खेजड़ी के संरक्षण को लेकर बिश्नोई समाज सहित 36 कौम के लोग संकल्पित हैं। सरकार ने कानून बनाने में कोई कसर छोड़ी तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा, लेकिन इस बार समाज शांत नहीं बैठेगा।”
-रामगोपाल बिश्नोई, संयोजक पर्यावरण संघर्ष समिति “सरकार ने हमारी बात रखी है। यह संतों की जीत है। बिश्नोई समाज सहित पूरी 36 कौम की जीत है। पर्यावरण प्रेमियों की जीत है, लेकिन संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है।”
-परसराम बिश्नोई, संयोजक, खेजड़ी बचाओ आंदोलन


