टोंक में 3 दिन तक चार नाटकों का मंचन हुआ:अंधविश्वास, स्वतंत्रता और कलाकार समाज संबंधों के विषय दिखाएं, उमड़े सैकड़ों दर्शक

टोंक में कम्युनिटी थिएटर टोंक सोसायटी और एक्स्ट्रा एन ऑर्गेनाइजेशन की ओर से 3 दिन तक नाट्य प्रस्तुतियां की गईं। एक्सपेरिमेंटल स्टूडियो टोंक में हुए इस कार्यक्रम में अलग अलग शहरों के कलाकारों ने 4 नाटकों के जरिए अंधविश्वास, स्वतंत्रता, समाज और कलाकार के रिश्तों जैसे मुद्दों को दर्शकों के सामने रखा। तीनों दिन दर्शकों की मौजूदगी रही और प्रस्तुतियों को लेकर संवाद बना रहा। पहले दिन राजनीतिक और सामाजिक विषय पर नाटक
पहले दिन प्रयागराज के युवा रंगकर्मी हरमेंद्र सरताज के निर्देशन में दारियो फो द्वारा लिखित नाटक कांट पे वांट पे प्रस्तुत किया गया। नाटक में आम आदमी के ट्रेड यूनियनों और राजनीतिक पार्टियों से मोहभंग की स्थिति को दिखाया गया। कहानी में यह दिखाया गया कि किस तरह आम आदमी खुद फैसले लेने को मजबूर होता है। नाटक को मौजूदा सामाजिक हालात से जोड़कर पेश किया गया। इसमें हर्ष राज, चाहत जयसवाल, आयुष केसरवानी, शालिनी मिश्रा, हर्षित केसरवानी, हेमंत सिंह, शिखर चंद्रा, ऋषि गुप्ता और आबिद ने अभिनय किया। दूसरे दिन डाकघर में स्वतंत्रता का भाव
दूसरे दिन शाम 4.30 बजे चितरंजन नामा के निर्देशन में नाटक डाकघर मंच पर आया। यह नाटक जीवन और मृत्यु के बीच आंतरिक स्वतंत्रता की भावना को दर्शाता है। कहानी एक बीमार बच्चे अमल के इर्द गिर्द घूमती है, जो घर की चारदीवारी में रहते हुए भी कल्पना और संवाद के जरिए आजादी महसूस करता है। मंच पर कई खिड़कियों के जरिए इस भाव को दिखाया गया। नाटक में आशीष चावला, मणिकांत लक्षकार, रामरतन गुगलिया, अदनान खान, राजवंती तमोली, शादाब, आफताब नूर, करन कुमार और मोहित वैष्णव ने अभिनय किया। मंच परे शुभम, आशीष और विजयलक्ष्मी रहे। नदी प्यासी थी में अंधविश्वास पर सवाल
इसी दिन शाम 6.15 बजे हरमेंद्र सरताज के निर्देशन में धर्मवीर भारती की कहानी पर आधारित नाटक नदी प्यासी थी प्रस्तुत किया गया। नाटक में गांव में फैले अंधविश्वास और बाढ़ को लेकर किए जाने वाले पाखंड को दिखाया गया। कहानी में यह सामने आता है कि किस तरह डर और मानसिक दबाव इंसान को जकड़ लेता है। एक ओर उफनती नदी और दूसरी ओर इंसानी मन को समानांतर दिखाया गया। इसमें चाहत जायसवाल, हर्ष राज पाल, आयुष केसरवानी, शालिनी मिश्रा और हर्षित केसरवानी ने अभिनय किया। मंच परे मो. आबिद, ऋषि गुप्ता, शिखर चंद्रा और हेमंत सिंह रहे। तीसरे दिन कलाकार और समाज का रिश्ता
तीसरे दिन राजकुमार रजक के निर्देशन में नाटक भूखवासी भांड प्रस्तुत किया गया। यह नाटक कलाकार और समाज के बदलते रिश्तों पर केंद्रित रहा। कहानी फ्रांज काफ्का की दि हंगर आर्टिस्ट और प्रफुल्ल राय की बाघ नाच से प्रेरित रही। इसमें कलाकार की इच्छाओं, संघर्षों और मानसिक स्थिति पर समाज के दबाव को दिखाया गया। नाटक में शुभम मेघवंशी, आशीष धाप, आशीष चावला, अवधेश कुमार, मणिकांत लक्षकार, अदनान खान और विजयलक्ष्मी तसेरा ने अभिनय किया। दर्शकों की सहभागिता और अतिथि मौजूद रहे
कम्युनिटी थिएटर टोंक से जुड़े मोहित वैष्णव ने बताया कि तीन दिन की प्रस्तुतियों से टोंक में रंगमंच को लेकर सकारात्मक माहौल बना। दर्शकों की भागीदारी लगातार बनी रही। इस दौरान लखनऊ से वरिष्ठ कला समीक्षक और नाद रंग के संपादक आलोक पराड़कर तथा जयपुर के लेखक और वरिष्ठ नाट्य आलोचक राघवेंद्र रावत मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में द इवेंट टॉली, अक्स टेक और माइंड मैक्स अकैडमी का सहयोग रहा, जबकि मीडिया सहयोग स्वर्ण खबर और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म मजाकिया ने किया।

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