क्रिकेट कंट्रोवर्सी:अब सीएस ने सुरक्षा को लेकर BCCI को लिखा पत्र,…तो क्या इस बार भी आरसीए नहीं कराएगा आईपीएल

राजस्थान रॉयल्स के मैच जयपुर से बाहर न जाएं, इसको लेकर राजस्थान सरकार में टॉप लेवल तक जद्दोजहद चल रही है। राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल के सचिव नीरज के. पवन पहले ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को पत्र लिख चुके हैं। अब राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भी बीसीसीआई के सचिव देवजीत सेकिया को एक पत्र लिखा है। यह पहली बार है कि जब मुख्य सचिव की ओर से बीसीसीआई के पत्र लिखा गया है। इस पत्र मे राजस्थान रॉयल्स द्वारा एसएमएस स्टेडियम की सेफ्टी और सुरक्षा पर उठाए गए सवाल का जिक्र किया गया है। मुख्य सचिव ने लिखा है कि दर्शकों की सेफ्टी और सुरक्षा में राजस्थान सरकार किसी तरह की कमी नहीं आने देगी। हमने एक कमेटी बनाकर सर्वे कराया है। इस उच्च स्तरीय कमेटी ने जो भी कमियां गिनाई हैं, उन्हें समय रहते दुरुस्त कर लिया जाएगा। सभी संबंधित एजेंसियां से बातचीत के लिए नीरज के. पवन को नोडल ऑफिसर बनाए जाने की भी बात इस पत्र में की गई है। BCCI ने पिछले साल साफ लिखा था कि आगे से RCA ही IPL कराएगी, वरना जयपुर में नहीं होंगे मैच यहां सवाल यह उठता है कि क्या इस बार भी राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) को आईपीएल की मेजबानी की जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। पिछली बार जब जयपुर को आईपीएल की मेजबानी दी गई थी तो बीसीसीआई ने स्पोर्ट्स काउंसिल को ई-मेल कर साफ-साफ कह दिया था कि यह अंतिम बार है कि हम आपको आईपीएल की जिम्मेदारी दे रहे हैं। अगली बार से हमारी यूनिट यानी RCA ही आईपीएल कराएगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो जयपुर में आईपीएल मैचों का आयोजन नहीं होगा। ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर RCA को IPL दूर रखने की तैयारी हो रही है। आरसीए के अस्तित्व पर सवाल- 5 सदस्य जरूरी, कन्वीनर पर हाई कोर्ट का प्रतिबंध, अब 4 ही रह गए
आरसीए अस्तित्व में है भी या नहीं, इस पर भी बड़ा सवाल है। स्पोर्ट्स एक्ट में आरसीए एडहॉक कमेटी में कम से कम 5 और अधिकतम 21 सदस्य हो सकते हैं। कन्वीनर के काम पर हाई कोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया है। नियुक्ति पर ही प्रश्नचिह्न है। ऐसे में कमेटी की सदस्य संख्या 4 ही रह गई है। जब तक कमेटी में कन्वीनर की नियुक्ति नहीं होती और सदस्यों की संख्या 5 नहीं होती, तब तक आरसीए का अस्तित्व ही नहीं है। रजिस्ट्रार एडहॉक कमेटी नियुक्त करता है, अब आरसीए के अस्तित्व पर वही फाइनल फैसला ले सकता है। इधर, बचे 4 सदस्यों ने एडवोकेट विशन दास को हटा दिया है।

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