बड़ा गुईरा में ग्रामीण मुंडा पद एक साल से रिक्त:ग्रामीणों ने मंत्री कार्यालय पहुंच जताया आक्रोश, कहा-कई महत्वपूर्ण कार्य बाधित हो गए हैं

पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर प्रखंड स्थित बड़ा गुईरा गांव में प्रशासनिक लापरवाही के कारण ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। गांव में लगभग एक वर्ष से ग्रामीण मुंडा का पद रिक्त है, जिससे राजस्व और प्रमाण-पत्र संबंधी कई महत्वपूर्ण कार्य बाधित हो गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, स्थानीय प्रतिनिधि के अभाव में जाति, आय और आवासीय प्रमाण-पत्र बनवाने में भारी कठिनाई हो रही है। इसके अतिरिक्त, जमीन की नापी, लगान जमा करने, नामांतरण और अन्य भूमि संबंधी कार्य भी समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। इन सेवाओं में हो रही देरी का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों, किसानों और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है। छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले, छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रमाण-पत्रों की आवश्यकता होती है, लेकिन दस्तावेज समय पर न मिलने से उन्हें प्रखंड और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई: ग्रामीण ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने गुरुवार को सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन किया। बड़ा गुईरा से सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष चाईबासा पहुंचे। उन्होंने राज्य के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार तथा परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा के सरनाडीह स्थित कार्यालय में अपनी समस्याएं प्रस्तुत कीं। ग्रामीणों ने मंत्री को एक मांग-पत्र सौंपा, जिसमें शीघ्र ग्रामीण मुंडा की नियुक्ति की मांग की गई। मंत्री दीपक बिरुवा ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद ग्रामीण शांतिपूर्वक अपने गांव लौट गए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं हुआ, तो वे आगे व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब बड़ा गुईरा के ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि उनकी लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।

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