युवक की साउथ अफ्रीका में मौत,शव लाने का संकट:गांव ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन,मांग-सरकारी खर्चे पर भारत लाए शव

साऊथ अफ्रिका में मजदूरी करने गए अलवर के युवक की संदिग्ध हालात में हार्ट अटैक से मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया। परिजनों और समाज के लोगों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर शव को भारत लाने की मांग की है। 15 अगस्त को गया था विदेश राजगढ़ क्षेत्र के अलवर जिले के धमरेड़ गांव निवासी 37 वर्षीय गंगाराम योगी पुत्र छोटेलाल 15 अगस्त 2025 को मजदूरी के लिए साउथ अफ्रीका गया था। परिजनों के अनुसार वह वहां लुसाका में काम कर रहा था। बुधवार सुबह अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने के करीब आधे घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। नाश्ते के बाद बिगड़ी तबीयत, इंजेक्शन के बाद मौत भतीजे विष्णु कुमार योगी ने बताया कि सुबह गंगाराम ने नाश्ता किया था। इसके बाद उसे सर्दी महसूस हुई और उसने दवा ली। आराम नहीं मिलने पर कमर में तेज दर्द शुरू हो गया। अस्पताल में इंजेक्शन लगाने के कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई। परिवार को बताया गया कि हार्ट अटैक से जान गई। गांव में शोक, कई घरों में नहीं जले चूल्हे डीएनटी के अलवर संयोजक पुखराज योगी ने बताया की मौत की खबर मिलते ही धमरेड़ गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे गांव में मातम है और कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। शुक्रवार को डीएनटी समाज के अलवर संयोजक पुखराज योगी के नेतृत्व में समाज के लोग जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने ज्ञापन देकर केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से मांग की कि गंगाराम का शव जल्द भारत लाया जाए। साथ ही शव लाने का खर्च सरकार उठाए और परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए। ठेकेदार कंपनी के खर्च पर ले गया था परिजनों के अनुसार गंगाराम को अजमेर जिले के किशनगढ़ निवासी ठेकेदार जीतू राजपूत कंपनी के खर्च पर विदेश लेकर गया था। वह हर महीने 30 से 35 हजार रुपए घर भेजता था, लेकिन पिछले दो-तीन महीनों से पैसे नहीं आए थे। गंगाराम अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गया है। तीनों बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। पिता का पहले ही निधन हो चुका है और बुजुर्ग मां घर पर हैं। तीन भाई खेती-बाड़ी और मजदूरी कर परिवार चला रहे हैं।विदेश में कमाई कर परिवार का सहारा बने गंगाराम की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब सभी की निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि कब उसका पार्थिव शरीर अपने गांव पहुंचेगा।

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