रिटायर्ड कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देने पर भड़का कर्मचारी संघ:संविदा प्रथा खत्म नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की तैयारी

सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा संविदा नियुक्ति देने के फैसले के खिलाफ प्रदेश का सबसे बड़ा कर्मचारी संगठन मुखर हो गया है। करीब दो लाख से अधिक शासकीय और अशासकीय कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन इस मुद्दे पर उग्र आंदोलन की तैयारी में है। पदोन्नति पर लग रहा ब्रेक: फेडरेशन फेडरेशन के नेताओं ने कहा कि रिटायर्ड अधिकारियों को संविदा पर रखने से नियमित कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हो रही है। वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारी प्रमोशन का इंतजार करते हैं, लेकिन रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति होने से उनके करियर उन्नयन के अवसर रुक जाते हैं। नेताओं का कहना है कि इससे कर्मचारियों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। पारदर्शिता पर भी उठाए सवाल संघ ने संविदा नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि प्रक्रिया स्पष्ट और प्रतिस्पर्धात्मक नहीं होगी तो पक्षपात और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ सकती है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे। आधार आधारित अटेंडेंस पर भी नाराजगी बैठक में आधार बेस्ड अटेंडेंस व्यवस्था का भी विरोध किया गया। चेतावनी दी गई कि यदि इसे समाप्त नहीं किया गया तो सभी प्रांत अध्यक्ष रायपुर में बैठक कर आंदोलन की अंतिम रणनीति तय करेंगे। 60% स्टाफ से चल रहे विभाग कर्मचारी नेताओं ने दावा किया कि अधिकांश विभाग केवल 60 प्रतिशत कर्मचारियों के बल पर चल रहे हैं। राज्य गठन के बाद जनसंख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है, लेकिन विभागीय ढांचे में बदलाव नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है और उन्हें देर रात तक काम करना पड़ रहा है। 11 सूत्रीय मांगों पर सत्र में प्रदर्शन बैठक में 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में आगामी विधानसभा सत्र के दौरान उग्र प्रदर्शन करने का सुझाव भी रखा गया। फेडरेशन की प्रांतीय बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय करने की जिम्मेदारी कोर कमेटी को सौंपी गई है। कोर कमेटी जल्द बैठक कर आगे की रणनीति घोषित करेगी।

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