सवाई ईश्वरी सिंह की जयंती, ढुंढाड़ संस्कृति परिषद की घोषणा:जयपुर में स्थित जनानी ड्योढ़ी में हुए जौहर के इतिहास के बारे में जानकारी दी

जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह के ज्येष्ठ पुत्र महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह की 305वीं जयंती के अवसर पर सवाई ईश्वरी सिंह की छतरी पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जयपुर के इतिहासकार, साहित्यकार, चित्रकार और ढुंढाड़ी भाषा के कवियों ने महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय की कार्यकारी ट्रस्टी रमा दत्त भी उपस्थित रहीं। ढुंढाड़ संस्कृति परिषद की भी घोषणा की गई कार्यक्रम के दौरान सम्पूर्ण ढुंढाड़ क्षेत्र की कला, इतिहास और संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ढुंढाड़ संस्कृति परिषद की भी घोषणा की गई। जिसे जल्द ही रजिस्टर करा के पूरे ढुंढाड़ क्षेत्र मे कला और संस्कृति को प्रोत्साहन देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर सवाई पद्मनाभ सिंह का संदेश भी प्रस्तुत किया गया। जिसमें उन्होंने कहा कि जयपुर की कला, संस्कृति, साहित्य और सनातन की परंपरा को हर युवा और जन-जन तक पहुंचाई जानी चाहिए, इसके लिए वे सहयोग करने के लिए सदैव तत्पर हैं। विश्वासघात की कहानी को संक्षिप्त में बताया इस आयोजन के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- भौमिया महाराज पर जयपुरवासियों की आस्था बहुत मजबूत है। इसके साथ ही शेखावत ने महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह के साथ हुए विश्वासघात की कहानी को संक्षिप्त में बताया। किस प्रकार अपने विश्वसनीय हर गोबिंद नाटाणी के विश्वासघात के कारण मराठाओं से हार गए और दुख में अपने प्राण त्याग दिए। उन्होंने जयपुर में स्थित जनानी ड्योढ़ी में हुए जौहर के इतिहास पर भी रोशनी डाली। इतिहास के प्रोफेसर रहे राघवेंद्र सिंह मनोहर ने बताया- ईश्वरी सिंह बहुआयामी व्यक्तित्व थे। उनका कार्यकाल मात्र 7 वर्ष का रहा, लेकिन उनकी उपलब्धियां अनेक थीं। स्थापत्य और चित्रकला में उनकी विशेष रूचि थी। आगे सवाई ईश्वरी सिंह द्वारा लड़े महत्वपूर्ण युद्धों पर भी प्रकाश डाला। इसमें राजमहल युद्ध, बगरू युद्ध, हाथियों की लड़ाई आदि शामिल थे। वहीं, इतिहास और साहित्य प्रेमी, गोपीनाथ पारीक ने छंदों के माध्यम से सवाई ईश्वरी सिंह के जीवन पर बात की। उन्होंने बताया- वे मंत्रों के विशेषज्ञ रहे, जिन्होंने मंत्रों का काफी प्रचार किया। इसके साथ ही, उन्होंने संस्कृत, बृज और ढुंढाड़ी भाषा को भी बढ़ावा दिया था। अन्य वक्ता, कवि और प्रोफेसर गोविंद शंकर शर्मा ने सवाई ईश्वरी सिंह से जुड़े इतिहास और तथ्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कुलवंत सिंह, डॉ सुभाष शर्मा, पर्यावरण विद् सूरज सोनी और पूर्व पार्षद, विक्रम सिंह तंवर शामिल रहे। कार्यक्रम में सभी का स्वागत वैदिक चित्रकार रामू रामदेव ने किया और समापन पर कल्याण सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आगे पढ़ें जयपुर की प्रमुख खबरें…

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