छत्तीसगढ़ बोर्ड की दसवीं-बारहवीं परीक्षा नजदीक है। इस बीच अच्छी खबर यह है कि बोर्ड परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन आने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। चार साल से हर बार दसवीं में एक लाख से अधिक प्रथम श्रेणी से पास हुए। बारहवीं में भी 60 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जानकारों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले दसवीं की परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया गया। इसमें बहुवैकल्पिक प्रश्नों काे शामिल किया गया। सवालों के स्तर को तीन कैटेगरी में सरल, औसत और कठिन में बांटा गया। जैसे अंग्रेजी के पेपर में 36 प्रतिशत सरल, 48 प्रतिशत औसत और 16 प्रतिशत कठिन सवाल पूछे जाते हैं। गणित में 30 सरल, 50 औसत और 20 प्रतिशत कठिन प्रश्न आते हैं। इस वजह से न सिर्फ पास होने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। बल्कि अधिक संख्या में छात्र फर्स्ट डिवीजन से पास हो रहे हैं। सीजी बोर्ड परीक्षा 2025, एक मार्च से शुरू होने वाली है। इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा मंडल से तैयारी की जा रही है। बारहवीं की परीक्षा एक मार्च से और दसवीं की तीन मार्च से शुरू होगी। प्री-बोर्ड के रिजल्ट ने परेशानी बढ़ाई दसवीं-बारहवीं परीक्षा की तैयारी का आंकलन करने के लिए पिछले महीने प्री-बोर्ड का आयोजन किया गया था। इसके नतीजों ने स्कूलों की परेशानी बढ़ा दी है। रायपुर जिले के सरकारी स्कूलों में दसवीं मंे 26 प्रतिशत और बारहवीं मंे 22 फीसदी छात्र कमजोर मिले हैं। इसी प्रदेश के अन्य जिलों में भी दसवीं-बारहवीं प्री-बोर्ड का रिजल्ट ऐसा ही रहा है। जानकारों का कहना है कि जनवरी का पूरा महीना मॉक टेस्ट, प्री-बोर्ड और प्रैक्टिकल एग्जाम में निकल गया। यही समय परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसमें कमजोर छात्रों काे उनकी कमियां दूर करने के उपाय किए जाते हैं। उनकी अतिरिक्त क्लासेस लगाई जाती है। लेकिन इस बार प्री-बोर्ड की देरी और निकाय व पंचायत चुनाव की वजह से अतिरिक्त कक्षाओं के लिए समय नहीं मिला। बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट का ऐसा रहा ट्रेंड
सीजी बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट में हर साल कितने छात्र फर्स्ट डिवीजन से पास हो रहे हैं, ट्रेंड क्या है। इसे लेकर 2020 से लेकर वर्ष 2024 तक के दसवीं के रिजल्ट का एनालिसिस किया गया। इसमें पता चला कि 2020 में 32 प्रतिशत छात्र फर्स्ट डिवीजन से पास हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसी तरह बारहवीं के आंकड़ों से पता चलता है कि इसमें भी फर्स्ट डिवीजन आने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2020 में 72385 (26.2%) प्रथम श्रेणी से पास हुए थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 88101 (34.7 %) हो गया है।


