महर्षि के रूप में पहला आश्रम बांसवाड़ा में खोला फिर उत्तम स्वामी से महामंडलेश्वर ईश्वरानंद बने

बांसवाड़ा| यौन शौषण के आरोपों से चर्चा में आए पंच अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी ने अपना पहला और मुख्य आश्रम बांसवाड़ा में खोला था। उदयपुर रोड पर रवींद्र ध्यान केंद्र नाम से खोले इस आश्रम का उद्घाटन 22 जुलाई 2013 को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर खुद उत्तम स्वामी ने किया था। बाद में इसका नाम उत्तम सेवा धाम कर दिया गया। इस आश्रम के खुलने के बाद धीरे-धीरे हरिद्वार, उज्जैन सहित देश के विभिन्न तीर्थ और धार्मिक स्थलों पर आश्रम शुरू किए। आश्रम से जुड़े सूत्रों के अनुसार बांसवाड़ा में जब मुख्य आश्रम शुरू किया, तब उत्तम स्वामी को ‘महर्षि’ कहा जाता था। इसके बाद ध्यानयोगी कहलाने लगे। हरिद्वार महाकुंभ में सनातनी अखाड़ा परिषद के प्राचीनतम एवं प्रतिष्ठित श्री पंच अग्नि अखाड़ा ने 10 अप्रैल 2021 को उत्तम स्वामी को महामंडलेश्वर की पदवी से अलंकृत किया। इस दौरान पट्टाभिषेक समारोह में संतों ने उन्हें नया नाम ईश्वरानंद दिया। इसके बाद उत्तम स्वामी को महामंडलेश्वर ईश्वरानंद महाराज के नाम जाना जाने लगा। पिछले वर्ष महाकुंभ में उत्तम स्वामी को विश्व की प्रतिष्ठित संस्था श्री काशी विद्वत परिषद के संरक्षक पद पर नियुक्त किया गया। उत्तम स्वामी महाराज के देश-विदेश में लाखों अनुयायी हैं। जबलपुर में कथा स्थगित, बांसवाड़ा में महाशिवरात्रि की तैयारियां ठंडी जानकारी के अनुसार उत्तम स्वामी की जबलपुर के सहजपुर में श्रीमद् भागवत कथा चल रही थी लेकिन शुक्रवार को कथा कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। श्रद्धालु कथा सुनने के लिए इंतजार करते रहे लेकिन उत्तम स्वामी कथा वाचन करने नहीं पहुंचे। इधर, बांसवाड़ा स्थित मुख्य आश्रम ‘उत्तम सेवा धाम’ में शिवरात्रि की तैयारियों पर भी असर पड़ा है। मुख्य आश्रम होने से यहां आश्रम से जुड़े लोगों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है लेकिन शुक्रवार को आश्रम में सन्नाटा ही नजर आया। महाशिवरात्रि के विशेष पूजन-अनुष्ठान की तैयारियां भी थमती नजर आई। टेंट लगाने के लिए सामान तो लाकर रख दिया गया लेकिन टेंट लगाने वाला कोई नहीं दिखा। बांसवाड़ा में उत्तम स्वामी का आश्रम।

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