भास्कर न्यूज | जालंधर शहर में साइबर अपराध का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने एआई तकनीक का दुरुपयोग करते हुए आधा दर्जन से अधिक नाबालिग बच्चियों की आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं। आरोपियों ने पहले पीड़ित परिवारों को ब्लैकमेल कर पैसों की मांग की और रकम न मिलने पर वीडियो सार्वजनिक कर दी। मामले की शिकायत मिलते ही कमिश्नरेट पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स से वीडियो अपलोड की गई थीं, उन्हें ट्रैक कर ब्लॉक कराया गया और आपत्तिजनक कंटेंट को हटवाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस डिजिटल साक्ष्य जुटा रही है और तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वीडियो एआई आधारित मॉर्फिंग तकनीक से तैयार की गई थीं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं साइबर क्राइम प्रभारी इंस्पेक्टर अजैब सिंह ने बताया कि महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 7 से 8 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। लेकिन इस मामले में कुछ भी सामने नहीं आ रहा है। जल्द मामले ट्रेस कर लेंगे। निजी फोटो को सोशल मीडिया साझा न करें ऐसे मामलों में घबराने की बजाय तुरंत पुलिस को सूचना देना जरूरी है। ब्लैकमेलिंग के दबाव में आकर पैसे देने से अपराधियों का हौसला बढ़ता है। वहीं बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और निजी फोटो या जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते समय सावधानी बरतें। एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसके दुरुपयोग के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसलिए डिजिटल जागरूकता, साइबर सुरक्षा उपाय और समय पर शिकायत इससे बचा सकती है। मुकेश चौधरी, साइबर विशेषज्ञ


