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मधुकम खादगढ़ा स्थित शिव दुर्गा मंदिर लेन में अदिवासी जमीन पर 40 वर्षों से रहने वाले 13 परिवार के घरों पर हो रही दखल दिहानी की कार्रवाई पर शुक्रवार को हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। इस रोक से उन 13 पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिनके घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा था। अपने टूटे हुए घर के सामने रेखा देवी खड़ी थीं, उनके चेहरे पर कार्रवाई रुकने की राहत से संतोष दिख रहा था। बातचीत में कहा- घर में ननद की शादी है। परिवार में खुशी का माहौल था। तैयारी अंतिम चरण में थी। 10 फरवरी को अचानक मकान पर बुलडोजर चला कर आगे का हिस्सा तोड़ दिया गया। हालांकि कोर्ट ने अब मोहलत दी है और घर तोड़ने पर रोक लगा दी है। सब कुछ ठीक रहा तो ननद की शादी यहीं से होगी। मायूस थे, एक-दूसरे को दे रहे थे सांत्वना… कार्रवाई करने पर कोर्ट की रोक की जानकारी मिलने के बाद काफी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे थे। सभी एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे थे। टूटे हुए 13 घरों के बाहर बैठे पीड़ित परिवार वहां पहुंचने वाले हर एक व्यक्ति को उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे थे। टूटे घर के बाहर बैठे पीड़ितों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर अब कैसे वह अपने घर को संभालें। ठेला चलाकर भरण पोषण करने वाले विनोद साव ने कहा कि खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं। पैसा भी नहीं है कि अब कोई दूसरी व्यवस्था कर सकें। इतने बड़े परिवार को किराए के घर में भी अब कैसे रखें। मेरे घर को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया है। सीओ बताएं, प्रार्थियों के नोटिस के जवाब पर क्या निर्णय लिया था झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मधुकम खादगढ़ा स्थित आदिवासी जमीन पर दखल-दिहानी के 13 घरों को तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने प्रार्थी रौनक कुमार सहित 11 अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। किसी प्रकार की पीड़क कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। अदालत ने हेहल सीओ से जवाब मांगा है कि प्रार्थियों के नोटिस के जवाब पर क्या निर्णय लिया। भास्कर इनसाइट पहले जमीन जेनरल मालिक ने बेची, फिर आदिवासी का दावा जिनके घर टूट गए, उन लोगों का कहना था कि महावीर उरांव से पहले जनरल व्यक्ति ने यह जमीन बेची थी। इसकी रजिस्ट्री भी कराई गई। इसके बाद महावीर ने आदिवासी जमीन होने का दावा करते हुए केस किया। जमीन मालिक आैर जमीन दलालों ने मिलकर भवन मालिकों से दोबारा एक करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की। पैसा लेने के बाद अवैध तरीके से एग्रीमेंट भी तैयार किया गया कि वह जमीन वापस नहीं लेगा। इसके बाद भी केस कर दिया। बार-बार ऐसा करके उगाही का खेल चल रहा है।


