चाईबासा सदर अस्पताल के रक्त केंद्र में पिछले तीन-चार दिनों से रक्त की भारी कमी हो गई है, जिससे मरीजों को गंभीर परेशानी हो रही है। इसका कारण थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला सामने आने के बाद रक्त स्क्रीनिंग प्रक्रिया को बंद करना है। रक्त केंद्र में मात्र एक यूनिट ए बी पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड बचा है। इस घटना के बाद से सदर अस्पताल में रक्त का स्टॉक गड़बड़ा गया है। नतीजतन सदर अस्पताल में एडमिट जरूरतमंद मरीजों के अटेंडरों के जूते चप्पल रक्त केंद्र का चक्कर लगाते लगाते घिस जा रहे हैं। सदर अस्पताल में एडमिट मरीज ही नहीं जिले के प्राइवेट अस्पतालों में इलाजरत जरूरतमंद मरीजों के समक्ष भी ब्लड को लेकर गंभीर समस्या पैदा हो गई है। यह स्थिति चाईबासा में ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित नहीं किए जाने की वजह से पिछले करीब तीन-चार दिन से उत्पन्न हुई है। मरीजों की जान बचाने के लिए अस्पताल प्रबंधक जरूरतमंद मरीजों को जमशेदपुर ले जाने की सलाह दे रहे हैं। जिससे गरीब मरीजों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले के बाद सदर अस्पताल में रक्त स्क्रीनिंग प्रक्रिया बंद कर दी गई है। रक्त की जांच के लिए जमशेदपुर व रांची भेजना पड़ता है। जिससे रिपोर्ट आने में देरी होती है। साथ ही रक्तदान शिविरों की कमी के कारण भी रक्त की कमी हो रही है। ऑपरेशन और सिजेरियन डिलीवरी प्रभावित हो रही है। मरीजों को रक्त की कमी के कारण रेफर किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त परेशानी हो रही है। जिले के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के समक्ष भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। ^ स्थानीय मंत्री दीपक बिरुवा को रक्त केंद्र की स्थिति से अवगत करा दिया गया है। मंत्री ने एक-दो दिन के भीतर रक्तदान कैंप कराने का आश्वासन दिया है। अस्पताल प्रशासन द्वारा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं और आम जनता से रक्तदान करने की अपील डीएस कार्यालय से लेटर इशू कर किया जा रहा है। अस्पताल के कर्मचारियों से भी रक्तदान करने की अपील की जा रही है। ताकि जरूरतमंद मरीजों की परेशानी को दूर कर उसकी जान बचाई जा सके। डॉक्टर शिवचरण हांसदा, सदर अस्पताल उपाधीक्षक।


