भास्कर न्यूज | बालोद मां गंगा मैया मंदिर स्थित स्वामी आत्मानंद स्मृति मंच में आयोजित दो दिवसीय गौ कथा के प्रथम दिवस पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गाय माता की महिमा का अनुभव किया। कार्यक्रम की शुरुआत पूज्यपद स्वामी गोपालन महाराज के कृपा पात्र स्वामी भारत महाराज द्वारा गौ माता की पूजा, दीप प्रज्वलन और व्यासपीठ पूजा से हुई। कथावाचक स्वामी ने गाय माता को सृष्टि का आधार बताते हुए वराह पुराण के उदाहरण के माध्यम से बताया कि भगवान वराह ने पृथ्वी माता को अपने दाढ़ में दबाकर बाहर निकाला और उसे गौ माता की कथा सुनाई। उन्होंने गौ माता के आध्यात्मिक, व्यवहारिक और वैज्ञानिक महत्व कों बताया। स्वामीजी ने श्रीकृष्ण की बाललीला का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बालकृष्ण गोचरण में भाग लेने के लिए उत्सुक थे, और मां यशोदा के साथ उनकी विनोदी वार्ता से गोचरण की महत्ता स्पष्ट हुई। इसके साथ ही शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए बताया कि भगवान शिव और भगवान गणेश के पूजन में भी गौ माता का विशेष महत्व है। गौ माता की पूजा करने से क्रोध शांत हो जाता है स्वामीजी ने उपस्थित जनों को समझाया कि गौ माता के पूजन से क्रोध शांत होता है, पुण्य प्राप्त होता है और समाज में धार्मिक एवं नैतिक मूल्य बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति परोपकार और अहिंसा के मार्ग पर चलता है, उसे ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। ऐसा आचरण न केवल आंतरिक शांति व आनंद देता है, बल्कि व्यक्ति को देवकोटि (श्रेष्ठ मनुष्य) की श्रेणी में लाता है। परोपकार, यानी दूसरों के कल्याण की भावना, सबसे बड़ा धर्म है, जो मनुष्य को ईश्वर के करीब लाता है। जो दूसरों को कष्ट में देखकर दुखी होते हैं और उनकी मदद के लिए तत्पर रहते हैं, उन पर ईश्वर हमेशा प्रसन्न रहते हैं। परहित के समान कोई धर्म नहीं है।


