डीजी राजीव कुमार शर्मा ने कहा:जिन थानों में वर्ष में 250 से कम मुकदमे दर्ज हों, वहां एसआई लग सकेंगे एसएचओ

प्रदेश में इंस्पेक्टर की कमी को देखते हुए पुलिस थानों में एसआई को भी प्रभारी लगाया जाएगा। एसआई एसएचओ उन्हीं थानों में लगाए जा सकेंगे जहां सालभर में 250 से ज्यादा मुकदमें दर्ज न किए गए हों। इसके साथ ही एसआई पद पर कार्य का 5 साल का अनुभव होना जरूरी है। पूर्व में पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया था कि प्रदेश के सभी पुलिस थानों में इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को ही प्रभारी लगाया जाएगा। इसके लिए लगातार एसआई से इंस्पेक्टर की पदोन्नतियां भी की गई और उन्हें नॉनफील्ड लगाने में छूट भी दी गई थी। लेकिन, प्रदेश में इंस्पेक्टर की कमी और उससे परेशानियों को देखते हुए एसआई को भी थाना प्रभारी लगाए जाने के लिए कहा गया है। डीजी राजीव कुमार शर्मा ने कहा है कि जिन पुलिस थानों में वार्षिक मुकदमों की संख्या 250 से ज्यादा न हो, उनमें एसआई स्तर के अधिकारी को एसएचओ लगाया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए एसआई पद पर 5 साल कार्य का अनुभव होना जरूरी है। केवल उन्हीं थानों में एसआई को एसएचओ लगाया जा सकेगा जो जिला मुख्यालय या उपखंड मुख्यालय पर स्थित ना हों। एसआई को थाना प्रभारी लगाने के लिए रेंज प्रभारी एडीजी या रेंज आईजी से अनुमोदन कराना होगा। राज्य में इंस्पेटरों की कमी के कारण शासन को नीतियों में करना पड़ा बदलाव
सितंबर 2025 में पुलिस मुख्यालय ने आदेश दिया था कि थानों ने एसएचओ के पद पर लगए एसआई हटाए जाएंगे और इंस्पेक्टरों की कमी को पूरा किया जाएगा। इसी क्रम में प्रमोशन और पदोन्नति देकर राज्य में 111 सब-इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर बनाया गया। सभी को जरूरी प्रशिक्षण देकर तैनात करने के बाद भी तमाम थाने खाली रह गए।रिक्त हुए एसआई पदों को देखते हुए एक हजार से अधिक एसआई भर्ती भी की गई।

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