खेतों में बिजली लाइनों का विरोध करने पर गिरफ्तारी:विधायक हरीश चौधरी बोले- किसानों के लिए मुआवजा नीति बने

बाड़मेर, बालोतरा और जालोर इलाके में सोलर परियोजना और पावर ग्रिड कंपनी काम कर रही है। किसानों के खेतों से 400केवी और 765 केवी हाईटेंशन लाइन बिछाई जा रही है। किसानों को बिना सूचना और पुलिस बल से काम चल रहा है। विरोध करने पर किसानों की गिरफ्तारी घटनाएं भी हुई है। बायतु विधायक हरीश चौधरी ने राजस्थान विधानसभा में नियम 295 के तहत यह मुद्दा उठाया। विधायक ने कहा किसानों को मुआवजे के लिए राज्य स्तर पर एकसमान, पारदर्शी एवं न्यायसंगत मुआवज़ा नीति बनाई जाए। बायतु विधायक ने कहा- परियोजनाओं के तहत खातेदारी भूमि पर लाइट पोल एवं कॉरिडोर स्थापित किए जा रहे हैं। लेकिन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। कई किसानों को बिना पूर्व सूचना सर्वे की कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जिससे उनमें असंतोष व्याप्त है। विरोध करने पर कुछ स्थानों पर प्रशासनिक दबाव, भारी पुलिस बल की तैनाती एवं किसानों की गिरफ्तारी जैसी घटनाएं भी हुई हैं। मुआवाजा देने में असमानता बायतु एमएलए चौधरी ने मुआवज़ा निर्धारण में भारी असमानता का आरोप लगाते हुए कहा- समान प्रकृति की भूमि होने के बावजूद कुछ किसानों को अधिक तथा कई को अत्यंत कम मुआवज़ा दिया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के साथ भेदभाव की शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि प्रति पोल और भूमि उपयोग के बदले दी जा रही राशि वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं है तथा वार्षिक किराया दरें अत्यंत न्यून हैं। विधायक ने मांग की कि सोलर एवं पावर ग्रिड परियोजनाओं हेतु खातेदारी भूमि के उपयोग के मामलों में राज्य स्तर पर एकसमान, पारदर्शी एवं न्यायसंगत मुआवज़ा नीति बनाई जाए। मुआवज़ा उच्चतम DLC दर अथवा वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप तय किया जाए तथा वार्षिक किराया दरों का पुनर्निर्धारण कर दीर्घकालिक भुगतान व्यवस्था लागू की जाए। किसानों को हो रहे नुकसान आंकलन करवाया जाए विधायक ने संयुक्त खातेदारी में सभी खातेदारों की अनिवार्य सहमति सुनिश्चित करने, किसानों के लिए सुरक्षा बीमा की व्यवस्था करने, रिहायशी क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी तय करने तथा फसलों एवं वृक्षों के नुकसान का अग्रिम मुआवज़ा देने की मांग की। साथ ही बिचौलियों की भूमिका एवं प्रशासनिक दबाव संबंधी शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच कराने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यह विषय किसानों के भूमि अधिकार, आजीविका और सामाजिक न्याय से जुड़ा है, इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ शीघ्र ठोस कदम उठाने चाहिए।

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