डूंगरपुर में राजीविका द्वारा आयोजित ‘राज सखी मेले’ ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन कर लाखों रुपए की कमाई की, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता की राह खुली है। यह सात दिवसीय मेला राजस्थान की लोक संस्कृति और आधुनिक उद्यमिता का संगम रहा। मेले में कपड़ों, मोजड़ियों और पारंपरिक तीर-कमान जैसे हस्तनिर्मित उत्पाद ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र रहे। मेले में भाग लेने वाली महिलाओं ने बताया कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि उनके उत्पादों को इतना बड़ा बाजार मिलेगा। इस मंच से उन्हें न केवल अच्छी कमाई हुई, बल्कि बाजार की मांग को समझने में भी मदद मिली, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। मेले में महिलाओं द्वारा तैयार साबुन और हर्बल गुलाल की विशेष मांग रही। खान-पान की स्टालों पर भी पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों का लोगों ने खूब लुत्फ उठाया। इस मेले की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इसने बिचौलियों को खत्म कर महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को सीधा लाभ पहुंचाया। राजसखी मेले से मिला उचित प्लेटफार्म
राजीविका के जिला परियोजना समन्वयक मोतीलाल मीणा ने बताया मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को एक उचित प्लेटफॉर्म देना है। सात दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए समूहों ने शानदार प्रदर्शन किया है। टर्नओवर उम्मीद से बेहतर रहा है और महिलाओं का उत्साह यह बता रहा है कि राजीविका का यह प्रयास सफल रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की मंशानुसार महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए काम किया जा रहा है। महिला समूहों को उनका व्यवसाय शुरू करने या व्यवसाय बढ़ाने के लिए कम ब्याज दर पर विभिन्न प्रकार के ऋण भी राजीविका के सहयोग से दिलाए जाते है ताकि महिलाएं आगे बढ़कर अपनी आर्थिक प्रगति कर सके। डूंगरपुर का राजसखी मेला सिर्फ व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा उत्सव बन गया है। इन सात दिनों ने सैंकड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति को नई मजबूती दी है। वाकई, जब महिलाओं को सही अवसर और मंच मिलता है, तो वे अपनी तकदीर खुद बदल लेती हैं। ‘राज सखी मेला’ जैसी पहल राजस्थान के ग्रामीण विकास में मील का पत्थर साबित हो रही है।


