राज्य में जमीन हड़पने और भूमि विवाद जैसे मामलों को रोकने के लिए सरकार ने नई पहल की है। सदस्य राजस्व परिषद सह अपर मुख्य सचिव मस्त राम मीणा की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति को जिम्मेदारी दी गई है कि वह अन्य राज्यों में जमीन कब्जा रोकने के लिए लागू कानूनों और परिपत्रों का अध्ययन करे और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे। समिति यह भी देखेगी कि झारखंड में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या नए प्रावधान जोड़े जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर नए कानून बनाने का सुझाव भी देगी। समिति पूर्व में गठित विभागीय समिति द्वारा प्रस्तावित एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) की भी समीक्षा करेगी। यह देखा जाएगा कि एसओपी में किसी तरह के संशोधन या नए प्रावधान जोड़ने की आवश्यकता है या नहीं। इस पहल को जमीन कब्जा और बढ़ते भूमि विवादों पर नियंत्रण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई 10 नवंबर 2025 को उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद मुख्य सचिव ने इस मुद्दे पर बैठक की थी। इसके बाद 25 नवंबर 2025 को गृह विभाग ने विभागीय आदेश से एक समिति गठित की थी, जिसने जमीन हड़पने के मामलों को रोकने के लिए एसओपी प्रस्तावित किया था। अब राज्य स्तरीय समिति उस एसओपी की समीक्षा भी करेगी। नई समिति में कौन-कौन…नई समिति में मस्त राम मीणा को अध्यक्ष बनाया गया है। सदस्यों में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव चंद्रशेखर, पूर्वी छोटानागपुर प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक और अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद शामिल हैं। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है। रांची व देवघर के उपायुक्तों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।


