राजस्थान सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। विभाग के सचिव वी. सरवण कुमार ने राजस्थान विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में इंडस्ट्री-अकादमिक संगोष्ठी श्रृंखला शुरू करने की घोषणा की। राजस्थान विश्वविद्यालय के रसायन विभाग में सोमवार को सोसाइटी ऑफ मटेरियल केमिस्ट्री के मुंबई और जयपुर चैप्टर के सहयोग से ‘रासायनिक, भौतिक और पदार्थ विज्ञान में नवाचार और करियर के अवसर विषय पर आयोजित संगोष्ठी में सचिव कुमार ने कहा कि अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के बीच संवाद बढ़ाने से नवाचार, स्टार्टअप और व्यावहारिक समाधानों को बढ़ावा मिलेगा। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा ने इस पहल का स्वागत करते हुए संस्थान की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की पेटेंट सेल छात्रों के अभिनव विचारों को पेटेंट कराने में मदद करेगी, जिससे उनकी खोज व्यवसायिक रूप ले सकेंगी। कार्यक्रम में छात्रों को दैनिक जीवन में उपयोगी वैज्ञानिक समाधान विकसित करने और रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली सामग्रियों को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया गया। इस संगोष्ठी में रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, लंदन (RSC) की “फ्यूचर ऑफ केमिकल साइंस एजुकेशन स्ट्रैटजी चयन समिति की सदस्य, प्रो. नीलिमा गुप्ता ने स्कूल स्तर पर विज्ञान शिक्षा को मजबूत करने के लिए एक विशेष प्रस्ताव रखा। उन्होंने सरकारी स्कूलों के विज्ञान शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि छात्रों में वैज्ञानिक सोच और रसायन विज्ञान की समझ को विकसित किया जा सके। वी. सरवण कुमार ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए आश्वासन दिया कि डी.एस.टी रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के सहयोग से राजस्थान सभी जिला मुख्यालयों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करेगा, जिससे शिक्षकों में नवाचार-उन्मुख मानसिकता को बढ़ावा मिल सके। इस संगोष्ठी में BARC के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने रासायनिक और पदार्थ विज्ञान में उभरते रुझानों, करियर अवसरों और उद्योग के विकास पर चर्चा की। डॉ. संदीप निगम ने पदार्थ विज्ञान में करियर संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. प्रमोद शर्मा ने रासायनिक विज्ञान में उभरती तकनीकों और नवाचारों पर बात की। डॉ. धीरज जैन ने भारतीय परमाणु कार्यक्रम में रसायन अनुसंधान की भूमिका समझाई। संगोष्ठी का संयोजक प्रो.नीलिमा गुप्ता ने बताया कि इस संगोष्ठी में 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिससे विज्ञान और उद्योग के बीच सार्थक संवाद स्थापित हुआ।


