पोक्सो केस में पुलिस की लापरवाही पर कोर्ट सख्त:आरोपी की गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को नहीं दी, कोर्ट ने निजी मुचलके पर छोड़ा

सिरोही के पोक्सो विशेष न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विशेष न्यायाधीश अनूप कुमार पाठक की अदालत ने आबूरोड सदर थाना पुलिस द्वारा एक आरोपी की गिरफ्तारी में बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए आरोपी को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामले में पुलिस ने 16 फरवरी को रात साढ़े 8 बजे आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि उन्होंने गिरफ्तारी की सूचना आरोपी के मामा को एक मोबाइल नंबर पर दी थी, लेकिन जांच में पता चला कि वह मोबाइल नंबर आरोपी का खुद का था। इतना ही नहीं केस डायरी में ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को लिखित या मौखिक रूप से दी गई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले (विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य 2025) का हवाला देते हुए कहा कि कानून के मुताबिक बिना वारंट गिरफ्तारी के मामले में पुलिस को तुरंत आरोपी और उसके परिजनों को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना अनिवार्य है। इस मामले में पुलिस ने न तो आरोपी को और न ही उसके परिवार को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराया। न्यायालय ने इस गंभीर चूक को देखते हुए सिरोही पुलिस अधीक्षक को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रति भेजकर निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ थाना अधिकारियों और जांच अधिकारियों से कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करवाएं। इस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक दृष्टांत में आरोपी की गिरफ्तारी अवैध होना पाए जाने से आरोपी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार स्वयं के मचलके पर रिहा किया जाना न्याय उचित पाया जाता है। इस दौरान आरोपी को हिदायत दी गई है कि वह पुलिस अधिकारी अनुसंधान अधिकारी द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने के लिए जैसे और जब अपेक्षित उपलब्ध होगा। इस मामले के तथ्यों से अवगत किसी व्यक्ति को न्यायालय या पुलिस अधिकारी के समक्ष ऐसे तत्व को प्रकट न करने के लिए मनाने के वास्ते उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई उत्प्रेरण धमकी या वचन नहीं देगा और न्यायालय की आज्ञा के बिना भारत नहीं छोड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजकर विधि व्यवस्था की पालना उनके अधीनस्थ थाना अधिकारियों अनुसंधान अधिकारियों से सुनिश्चित कराने और रिमांड पत्र 3 मार्च 2025 को पेश करने के लिए कहा गया है।

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