नवदीक्षित पांचों साधु-साध्वी पहली बार घर पहुंचें, गोचरी आहार लिया:महिलाओं ने कलश लेकर गाए नूतन गीत, आचार्य बोले- पैदल विहार शुरू

बाड़मेर में नवदीक्षित पांचों साधु- साध्वी शहर में पहली बार गोचरी (भोजन) के लिए रवाना हुए। पांचों अपने-अपने घर के अलावा अन्य घरों में पहुंचकर गोचरी ली। इससे पहले महिलाओं ने मंगल गीत गाकर नूतन जैन मुनि और साध्वियों का स्वागत किया। इस दौरान नूतन जैन मुनि और साध्वी के दर्शन के लिए जैन समाज में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। दरअसल, दीक्षा लेने के बाद गोचरी के लिए जाते है। जैन साधु भोजन सामग्री इकट्‌ठा करने के लिए बाहर जाते है। इसे गोचर के लिए जाना कहते है। दरअसल, एक दिन पहले रविवार को 5 युवक-युवतियां ने सांसारिक जीवन छोड़कर संयम मार्ग अपनाया। बाड़मेर शहर के कुशल वाटिका में आचार्य जिन मणिप्रभ सागर व साध्वी विद्युतप्रभा सहित साध्वी कल्पलता, साध्वी श्रुतदर्शना, साध्वी मयूरप्रभा के सानिध्य में जैन समाज की चार बेटियों व एक बेटे ने दीक्षा गृहण की। इसके बाद सोमवार को नूतन जैन मुनि मेरूप्रभसागर, साध्वी ध्यानरूचिश्री, साध्वी अपूर्णरूचिश्री , साध्वी अनन्यरूचिश्री व साध्वी आप्तरूचिश्री नए नाम से संयम जीवन की यात्रा की प्रारम्भ की। खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभसूरीश्वर एवं साध्वी डॉ. विधुत्प्रभाश्री के सानिध्य में शहर में पहली बार गोचरी आहार ग्रहण करने के लिये निकले। इस दौरान उनके साथ जैन समाज के लोगो बड़ी संख्या में साथ साथ चलते नजर आए। नवदीक्षित साधु-साध्वी घर पहुंचे, गोचरी ग्रहण की नवदीक्षित यह पांचों साधु-साध्वी अपने घर पहुंचे। यहां पर अपने सांसारिक परिवार से गोचरी (भोजन) ग्रहण की। इस दौरान सिर पर कलश धारण किए हुए जैन समाज की महिलाओं ने नूतन जैन मुनि और साध्वियों के स्वागत में मंगल गीत गए। गोचरी ग्रहण करने के बाद वे शहर के कल्याणपुर स्थित जैन मंदिर पहुंचकर दर्शन किए। आचार्य जिन मणिप्रभ सूरीश्वर ने कहा कि गोचरी ग्रहण के बाद नव दीक्षित पैदल विहार आरम्भ करेंगे। साध्वी विद्युत्प्रभाश्री ने बताया- बाड़मेर से विहार कर ये बाछड़ाऊ जाएंगे। वहां मंदिर की प्रतिष्ठा में सानिध्य प्रदान करेंगे।

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