राजनांदगांव को ₹5.77 करोड़ की आपदा प्रबंधन स्वीकृति:विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से मिली सौगात

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से जिले के विकास को नई गति मिली है। राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) के तहत जिले में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों के लिए 5 करोड़ 77 लाख 43 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। यह राशि विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जहाँ मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव की समस्या बनी रहती थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करना है। डॉ. रमन सिंह ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों से मिली समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर आपदा न्यूनीकरण का प्रस्ताव रखा था। स्वीकृत राशि का एक बड़ा हिस्सा नदियों और नालों के किनारों को सुरक्षित करने के लिए खर्च किया जाएगा, जिसमें बाढ़ नियंत्रण और तटबंध संरक्षण प्रमुख प्राथमिकता है। राजनांदगांव विकासखंड के भर्रेगांव, जंगलेसर-मोखला, धामनसरा-मोहड़, रातापायली, मोखली और दाउटोला जैसे गांवों में बड़े स्तर पर तटबंध निर्माण कार्य होंगे। इससे कृषि भूमि का कटाव रुकेगा और रिहायशी इलाकों में पानी घुसने का खतरा समाप्त होगा। ग्रामीण इलाकों में आवागमन को सुगम बनाने के लिए दर्जनों स्थानों पर पुलिया निर्माण को भी मंजूरी मिली है। इससे बारिश के दिनों में गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से नहीं टूटेगा और कनेक्टिविटी मजबूत होगी। राजनांदगांव विकासखंड के डीलापहरी, कुम्हालोरी, टेडेसरा, धर्मापुर, सिंघोला, कोपेडीह, भोथीपारखुर्द, रवेली, सांकरा, खैरा, जंगलेसर, खुटेरी, परमालकसा, धानगसरा, ठाकुरटोला, कोटराभाठा, तोरनकट्टा और आरला में पुलिया निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, छुरिया विकासखंड के अजरकुंड और जोंधरा के विभिन्न आंतरिक मार्गों पर भी पुलिया निर्माण कार्य होंगे, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। आपदा प्रबंधन के साथ-साथ भविष्य में जल संकट से निपटने के लिए छुरिया विकासखंड के गौराघाट के पास एक स्टॉपडैम का निर्माण किया जाएगा। यह न केवल भू-जल स्तर को बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि सिंचाई के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कार्यों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।

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