रेरा मप्र की अधिकृत वेबसाइट (https://www.rera.mp.gov.in/) ही निवेशकों को भ्रमित कर रही है। एक ओर रेरा वेबसाइट के होम पेज पर ही बता रहा है कि उसने प्रदेश की 972 परियोजनाओं के आवेदन खारिज कर दिए हैं। वहीं दूसरी ओर इनमें से कई परियोजनाओं को स्वीकृत भी कर दिया है। 972 अपंजीकृत परियोजनाओं में से 206 इंदौर की बताई जा रही हैं। समस्त परियोजनाओं के सेक्शन में इंदौर की रिजेक्टेड परियोजनाओं की संख्या 220 बताई जा रही है। काॅलोनाइजर्स का कहना है आवेदन और दस्तावेज देने के बाद अप्रूवल और रजिस्ट्रेशन मिलता है। ऐसे में यदि निवेशकों को गलत जानकारी मिलती है तो परियोजना पर भी इसका असर पड़ता है। अनुमति के लिए अटके रहते हैं
क्रेडाई सदस्यों का कहना है कि कई प्रोजेक्ट्स को बेवजह लंबे समय तक अटकाया जा रहा है। इससे लागत बढ़ती है, वहीं निवेशकों का भरोसा भी कम होता है। वहीं रेरा से जुड़े लोगों का कहना है भूमि स्वामित्व को लेकर डेवलपर (कॉलोनाइजर) द्वारा चेन डॉक्यूमेंट पेश नहीं किए जाने के कारण ही अधिकांश प्रोजेक्ट अटके रहते हैं। वहीं कई कॉलोनाइजर्स समय सीमा में रेरा द्वारा मांगी गई जानकारी नहीं देते। इससे भी प्रोजेक्ट होल्ड या रिजेक्ट करना पड़ते हैं। पहले रिजेक्ट, फिर अप्रूव, अब दोनों श्रेणी में दर्ज ठक्कर श्री कनक सिटी फेज 1, 2, 3, शांति मार्वेला, एनआरके लक्स, कॉरिडोर इंडस्ट्रियल पार्क, न्यू रेसकोर्स बिजनेस पार्क, श्रीनाथ जी तिरुपति ग्रीन्स, सनमान सिटी, समृद्धि हिल्स व्यू, एक्जोटिका एवेन्यू, मिलेनियम सिटी, तिरुपति ग्रीन, प्रीमियम हाई लिंक पार्थ ग्रीन, कैलाश पैलेस सहित अन्य प्रोजेक्ट के आवेदन पहले रिजेक्ट हुए फिर कमियां पूर्ण करने के बाद अप्रूव हो गए। हालंकि रेरा की साइट पर इनके सहित अन्य प्रोजेक्ट को रिजेक्ट एवं अप्रूव दोनों दिखाया जा रहा है। शिविर में करेंगे निराकरण कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया, रेरा कोर्ट द्वारा क्रेताओं के पक्ष में जो आरआरसी आदेश जारी किए गए हैं उनका परीक्षण कराएंगे। रिफंड या प्लाॅट, मकान पर कब्जा दिलाने संबंधी तमाम मामलों की विस्तृत जांच कराएंगे। जिले में अब कितने आरआरसी जारी हुए, कितने मामलों का निराकरण हुआ, कितने प्रोसेस में हैं और कितने मामलों में कार्रवाई लंबित है, इसकी समग्र जानकारी बनाने के निर्देश संबंधित अधिकारी दिए जा रहे हैं। विशेष शिविर लगा कर पीड़ितों को न्याय दिलाएंगे।


