प्रतापगढ़ में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कथित भ्रष्टाचार प्रकरण ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. जीवराज मीणा पर लगे गंभीर आरोपों, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज शिकायत और भारत आदिवासी पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रदेश के राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सीएमएचओ डॉ. जीवराज मीणा पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कर्मचारियों पर दबाव बनाने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने जैसे आरोप हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक निजी अस्पताल संचालक ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें कथित आर्थिक लेन-देन और दबाव का उल्लेख है। मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उल्लेखनीय है कि राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, सीएमएचओ डॉ. जीवराज मीणा के जियाजी (बहनोई) हैं। जांच से पहले दोषी ठहराना गलत- मंत्री मीणा इस बीच, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा का बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्री ने कहा कि वे पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं और चाहते हैं कि मामले की तथ्यात्मक और निष्पक्ष जांच हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पारिवारिक संबंध होने के आधार पर किसी के पक्ष में खड़ा होना आवश्यक नहीं है और जांच से पहले किसी को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है। न्याय प्रक्रिया से ऊपर नहीं रिश्तेदारी- मंत्री मीणा मंत्री ने स्वीकार किया कि संबंधित अधिकारी उनके पारिवारिक रिश्तेदार हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि रिश्तेदारी न्याय प्रक्रिया से ऊपर नहीं हो सकती। उनका कहना था कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए, चाहे वह उनका अपना परिवार ही क्यों न हो। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनके नाम से जोड़कर राजनीतिक वातावरण दूषित करने का प्रयास भी किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्री का यह बयान दो संदेश देता है। एक ओर, वे निष्पक्ष जांच का समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर, वे बिना तथ्य सामने आए सार्वजनिक रूप से दोष तय करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठा रहे हैं।


