कांग्रेस विधायक से बहस करने वाले तहसीलदार के खिलाफ नोटिस:दीनदयाल बैरवा बोले- उसे सरकार का संरक्षण वरना ​क्या औकात MLA से उलझे

दौसा से कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा के साथ तहसीलदार गजानंद मीणा की बदसलूकी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बैरवा ने कांग्रेस विधायकों के साथ विधानसभा स्पीकर को तहसीलदार (दौसा) के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया। स्पीकर ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देते हुए नोटिस मंजूर कर लिया है। अब स्पीकर इस मामले को विधानसभा की विशेषाधिकार हनन कमेटी को सौंप सकते हैं। कमेटी पूरे मामले में तहसीलदार और संबंधित पक्षों को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर स्पीकर फैसला लेंगे। तहसीलदार जांच में दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उसमें निलंबन से लेकर इंक्रीमेंट रोकने सहित कानून सम्मत कोई भी एक्शन हो सकता है। दीनदयाल बैरवा बोले- स्पीकर ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है
दीनदयाल बैरवा ने कहा- 2 फरवरी को दौसा तहसीलदार ने बदतमीजी की थी। कई दिनों से हम तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। हमने विधानसभा में भी प्रदर्शन किया था। विधानसभा स्पीकर ने दौसा कलेक्टर और तहसीलदार को बुलाया। ताज्जुब की बात है कि स्पीकर के बुलाने के बावजूद कलेक्टर नहीं आए। स्पीकर के बुलाने के बावजूद कलेक्टर का नहीं आना दर्शाता है कि ब्यूरोक्रेसी किस कदर हावी है। हमारी पार्टी ने इसके बाद विशेषधिकार हनन प्रस्ताव लाने का फैसला किया। इसके बाद हमने दौसा तहसीलदार के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। स्पीकर ने नोटिस स्वीकार करके उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विधायक बोले- तहसीलदार की औकात क्या है कि विधायक से उलझ जाए
बैरवा ने कहा- यह केवल मेरा अपमान नहीं है। सभी 200 विधायकों का अपमान है। यह स्पीकर का भी अपमान है, क्योंकि वो भी विधायक हैं। एक अधिकारी के तौर पर विधायक के साथ इस तरह का बर्ताव गंभीर है। अब देखते हैं क्या कार्रवाई करते हैं? ब्यूरोक्रेसी पूरी तरह हावी है। क्या अफसर इसी तरह दलित विधायकों के साथ बदतमीजी करते रहेंगे, दलितों के मकान तोड़ते रहेंगे? तहसीलदार को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है नहीं तो अब तक कार्रवाई हो जाती। तहसीलदार को सीएम और बीजेपी का संरक्षण मिला हुआ है, वरना तो तहसीलदार की औकात क्या है कि विधायक से उलझ जाए। दौसा में अतिक्रमण हटाने के मुद्दे पर विधायक और तहसीदार में हुई थी बहस
दौसा में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के मामले में विधायक डीसी बैरवा और तहसीलदार गजानंद मीणा के बीच नोकझोंक हो गई थी। बैरवा ने तहसीलदार पर बदसलूकी करने, भूमाफिया से मिले होने और धमकी देने का आरोप लगाया था। तहसीलदार ने विधायक से कहा था- इस जमीन का मालिक मैं हूं। इसका वीडियो भी खूब चर्चित हुआ था। बदसलूकी का मामला विधानसभा में कई बार उठा, बैरवा ने सदन में प्रदर्शन भी किया
बैरवा से बदसलूकी का मामला विधानसभा में भी तीन बार उठा था। बैरवा ने वेल में जाकर प्रदर्शन भी किया था। शून्यकाल में यह मामला उठा था। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सदन में मामला उठाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। बैरवा राज्यपाल के अभिभाषण पर सीएम के जवाब के दौरान भी प्रदर्शन कर चुके हैं। स्पीकर ने हर बार मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया था। तहसीलदार दोषी पाए गए तो विधानसभा दे सकती है सजा
दौसा तहसीलदार को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति दोषी मानती है तो कार्रवाई होगी। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट स्पीकर को सौंपी जाती है। इसके बाद कार्रवाई के लिए सदन में वोटिंग करवाई जाती है। विधानसभा से दी गई सजा को विधानसभा ही माफ कर सकती है। विधानसभा सदन की तरफ से दी गई सजा पर अगर कोर्ट राहत देता है तो संवैधानिक संस्थाओं में टकराव हो सकता है। विधानसभा चाहे तो किसी कोर्ट के नोटिस को स्वीकार ही नहीं करे। 11 विधायकों की विशेषाधिकार समिति में बीजेपी के 6, कांग्रेस के 3 विधायक
11 विधायकों की विशेषाधिकार समिति में अध्यक्ष सहित बीजेपी के 6 विधायक हैं। कांग्रेस के 3, एक निर्दलीय और एक बीएपी​ विधायक मेंबर हैं। बीजेपी विधायक केसाराम चौधरी समिति के चेयरमैन हैं। समिति में कांग्रेस विधायक अशोक चांदना, पुष्कर लाल डांगी, प्रशांत शर्मा, बीजेपी विधायक गोपाललाल शर्मा, ताराचंद सारस्वत, प्रतापलाल भील, विक्रम जाखल, विश्वराज सिंह मेवाड़, बीएपी विधायक उमेश मीणा, निर्दलीय गणेशराज बंसल मेंबर हैं। इंस्पेक्टर को 2013 में विधानसभा ने सुनाई थी 30 दिन की सजा
विशेषाधिकार हनन के मामले में विधानसभा पहले भी एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर को सजा सुना चुकी है। विधानसभा की महिला और बाल कल्याण समिति ने रत्ना गुप्ता के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। आरोपों के मुताबिक, भाजपा विधायक सूर्यकांता व्यास की अध्यक्षता वाली समिति जब 19 जुलाई 2010 को गांधी नगर महिला थाना (पूर्व) का निरीक्षण करने गई तो इंस्पेक्टर रत्ना गुप्ता ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए, समिति से खराब बर्ताव किया। इसके खिलाफ समिति ने विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया। अगस्त 2013 में समिति की रिपोर्ट पर इंस्पेक्टर रत्ना गुप्ता को 30 दिन जेल की सजा सुनाई गई थी। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत ने रत्ना गुप्ता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। रत्ना गुप्ता की सजा का मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सात दिन के लिए सजा पर रोक लगाई थी। सरकार बदलने के बाद 2014 में तत्कालीन स्पीकर कैलाश मेघवाल ने आगे इस मामले मेें रियायत दे दी थी। ————————————- विधायक से सरकारी अधिकारियों के विवाद की ये खबरें भी पढ़िए…

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