बस्तर के गांवों में पहुंची राज्य और यूनिसेफ की टीम:स्वच्छता मिशन को दी गति, समीक्षा भी की, ODF प्लस मॉडल पर फोकस

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण के तहत बस्तर जिले की ग्राम पंचायतों को ओडीएफ प्लस मॉडल के रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। 11 और 12 फरवरी को राज्य सलाहकार पुरुषोत्तम पांडा, जिला समन्वयक बस्तर, यूनिसेफ के प्रतिनिधि सुधांशु पांडेय और विकासखंड समन्वयकों की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न गांवों का दौरा कर स्वच्छता कार्यों की जमीनी समीक्षा की। दो दिवसीय भ्रमण का उद्देश्य पंचायतों में चल रही स्वच्छता गतिविधियों का मूल्यांकन करना और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करना रहा। पहले दिन टीम जगदलपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत नगरनार पहुंची, जहां सरपंच, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ बैठक कर नगरनार को मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करने की रणनीति पर चर्चा की गई। ई-रिक्शा और महिला समूहों की भागीदारी पर जोर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर देते हुए कचरा संग्रहण व्यवस्था को एमआरएफ से जोड़ने के निर्देश दिए गए। पंचायत स्तर पर ई-रिक्शा से कचरा संग्रहण शुरू करने और इसमें महिला समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। साथ ही पंचायत की स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के लिए एनएमडीसी के सीएसआर फंड के उपयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। दूसरे दिन टीम ने दरभा, तोकापाल और बस्तर विकासखंड की पंचायतों का मैराथन दौरा किया। दरभा के कामानार में सेग्रीगेशन शेड का निरीक्षण कर स्वच्छताग्राही दीदियों के कार्यों की सराहना की गई और 15वें वित्त आयोग से समय पर भुगतान तथा सेफ्टी किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। यहां आयोजित ‘वजन तिहार’ कार्यक्रम में कुपोषण और स्वच्छता के आपसी संबंधों पर ग्रामीणों से संवाद किया गया। सिंगनपुर में सामुदायिक स्वच्छता परिसर से आय बढ़ाने का सुझाव तोकापाल के सिंगनपुर में सामुदायिक स्वच्छता परिसरों को शादी-विवाह जैसे आयोजनों के लिए उपयोग शुल्क के साथ संचालित करने का नवाचारी सुझाव दिया गया, जिससे पंचायत की आय बढ़ सके। निरीक्षण के दौरान धरमाउर के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और सोनारपाल के फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यप्रणाली परखी गई। स्कूलों और आंगनबाड़ियों में गंदे जल के प्रबंधन के लिए सोख्ता गड्ढों और नाडेप निर्माण पर विशेष जोर दिया गया। अंत में जिला पंचायत में अधिकारियों के साथ बैठक कर फील्ड विजिट के निष्कर्ष साझा किए गए और जिले की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए आगामी कार्ययोजना तय की गई।

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