उदयपुर के RNT मेडिकल कॉलेज में नई सुविधा मिलेगी:सिकल सेल एनीमिया के लिए बनेगा देश का 17वां सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आदिवासियों को मिलेगा नया जीवन

राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य इलाकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत दी है। उदयपुर के आरएनटी (RNT) मेडिकल कॉलेज को अब सिकल सेल एनीमिया की जांच और बेहतरीन इलाज के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाया गया है। देशभर में ऐसे कुल 17 सेंटर तैयार किए गए हैं, जिनमें से राजस्थान के हिस्से में उदयपुर का नाम आया है। यह कदम मेवाड़ और वागड़ के उन लाखों आदिवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो पीढ़ियों से इस जेनेटिक बीमारी का दंश झेल रहे हैं। यह महत्वपूर्ण जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में दी। उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि मोदी सरकार देश के करीब 13 करोड़ आदिवासियों को इस बीमारी से मुक्त करने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। सांसद डॉ. रावत ने सरकार से पूछा था कि क्या दिसंबर 2025 तक 7 करोड़ लोगों की जांच का लक्ष्य पूरा हो जाएगा और अब तक राजस्थान की क्या स्थिति है? क्या है यह बीमारी और क्यों है इतनी खतरनाक सिकल सेल एनीमिया एक ऐसी जेनेटिक बीमारी है, जिसमें शरीर में मौजूद लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) गोल होने के बजाय हंसिए (सिकल) के आकार की हो जाती हैं। इससे नसें ब्लॉक होने लगती हैं और शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। मरीज को असहनीय दर्द होता है, शरीर टूट जाता है और बार-बार खून चढ़ाने की नौबत आती है। अब तक इस बीमारी के विशेषज्ञ इलाज के लिए आदिवासियों को जयपुर या अहमदाबाद की दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन अब उदयपुर का आरएनटी मेडिकल कॉलेज इसका सबसे बड़ा केंद्र बनेगा। गांव-गांव मुफ्त मिलेगी दवा और सलाह
सरकार ने इस बीमारी से लड़ने के लिए ‘हाइड्रोक्सीयूरिया’ जैसी जरूरी दवा को नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) की अनिवार्य लिस्ट में डाल दिया है। अब यह दवा केवल बड़े अस्पतालों में नहीं, बल्कि गांव के उप-स्वास्थ्य केंद्रों, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मुफ्त मिलेगी। इसके साथ ही, अब युवाओं को सलाह दी जा रही है कि वे शादी से पहले ‘सिकल सेल कार्ड’ जरूर चेक करें। अगर पति-पत्नी दोनों इसके वाहक (कैरियर) हैं तो बच्चों में यह बीमारी होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। उदयपुर सेंटर में अब जेनेटिक काउंसलिंग और योग के जरिए मरीजों की जीवनशैली सुधारने पर विशेष काम किया जाएगा। राजस्थान और देश का हाल
संसद में पेश किए गए ताजा डेटा के अनुसार, सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ चल रहा अभियान अब अपने लक्ष्य के बेहद करीब है। 3 फरवरी 2026 तक देश के जनजातीय इलाकों में 6.83 करोड़ से ज्यादा लोगों की जांच पूरी हो चुकी है, जिनमें से 2,37,981 लोग पूरी तरह रोगग्रस्त पाए गए हैं। वहीं, राजस्थान की स्थिति देखें तो यहां अब तक 37 लाख 6 हजार 689 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इस जांच में प्रदेश के 2,885 लोग गंभीर रूप से बीमार मिले हैं, जबकि 8 हजार 453 लोग इस बीमारी के ‘वाहक’ यानी कैरियर पाए गए हैं। सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक 7 करोड़ की जांच का आंकड़ा पार करना है, ताकि इस बीमारी को जड़ से मिटाया जा सके।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *