हजारीबाग वन भूमि घोटाले में एसीबी ने विशेष अदालत में 14 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें जांच एजेंसी ने 13 गवाहों की सूची भी सौंपी है, जिनमें तत्कालीन अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मी, एसीबी के डीएसपी समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि हजारीबाग में डीसी रहने के दौरान विनय चौबे ने विनय सिंह की पत्नी के नाम खरीदी गई वन भूमि की जमाबंदी के लिए अधीनस्थ अधिकारियों पर दबाव बनाया। एसीबी ने दावा किया है कि विनय चौबे और विनय सिंह के बीच व्यावसायिक संबंध रहे हैं। एसीबी ने चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता, उनके साले शिपिज त्रिवेदी व अन्य पारिवारिक सदस्यों और विनय सिंह की कंपनी के बीच करोड़ों रुपए के लेनदेन के दस्तावेज भी जमा किए गए हैं। भास्कर एक्सपर्ट- राजीव कुमार, एडवोकेट हाईकोर्ट जो गवाह बनाए गए हैं, वे भी इस मामले में हैं आरोपी, ऐसे में चौबे को मिल सकता है लाभ जांच एजेंसी ने इस मामले में जिन लोगो को गवाह बनाया है उनमें कई सरकारी अधिकारी हैं। इसमें तत्कालीन अंचल अधिकारी को भी गवाह बनाया गया है, जो खुद ही इस मामले में आरोपी है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि गलत करने वाला और गलत कराने वाला दोनों ही दोषी होती है। ऐसे में ये मामला कमजोर पड़ सकता है। एजेंसी ने अधिकांश गवाहों का बयान बीएनएनएस की धारा 180 के तहत दर्ज किया है। एजेंसी के समक्ष जो बयान गवाहों ने दिया है वे कई बार कोर्ट में जाकर अपने बयान से बदल भी जाते है। इसका फायदा विनय चौबे को इस केस में मिल सकता है।


