बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आते ही घरों का माहौल बदलने लगा है। जहां एक ओर बच्चे सिलेबस पूरा करने की दौड़ में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर पैरेंट्स का तनाव भी बढ़ता जा रहा है। कई घरों में पढ़ाई को लेकर इतनी सख्ती और अपेक्षाएं बढ़ गई हैं कि बच्चों का ध्यान पढ़ाई से हटकर मोबाइल, गेम्स या चुप्पी की ओर जा रहा है। शहर के मनोवैज्ञानिकों और शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस समय बच्चों को सबसे ज्यादा संतुलित माहौल की जरूरत होती है, लेकिन अनजाने में उन पर दबाव बढ़ा दिया जाता है। काउंसलिंग क्लीनिक में ऐसे केस बढ़ रहे हैं जहां बच्चे घबराहट, नींद की कमी और आत्मविश्वास में गिरावट की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, जबकि पैरेंट्स खुद भी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। मानसिक संतुलन नंबर से ज्यादा जरूरी बोर्ड परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। इस समय बच्चों में घबराहट सामान्य है, लेकिन अगर उन्हें लगातार तुलना, डांट या डर का सामना करना पड़े तो यह तनाव में बदल जाती है। पैरेंट्स को चाहिए कि वे पढ़ाई का एक शेड्यूल बनाएं, बीच-बीच में छोटे ब्रेक दें और बच्चे की मेहनत की सराहना करें, केवल परिणाम की नहीं। पढ़ाई के दौरान पर्याप्त नींद, हल्का व्यायाम और संतुलित आहार बेहद जरूरी है। लगातार कई घंटों तक बैठकर पढ़ने से बेहतर है कि बच्चा छोटे-छोटे लक्ष्य तय करे। साथ ही, घर का माहौल शांत और सहयोगी होना चाहिए। यदि बच्चा अचानक बहुत चुप हो जाए, गुस्सा दिखाए, रोने लगे या पढ़ाई से पूरी तरह दूरी बना ले, तो बातचीत करें या काउंसलिंग की मदद लें। रितु कपूर, काउंसलर केस 1 : नंबरों की चिंता में बच्चा हो गया चुप :शहर के एक स्कूल में पढ़ने वाला दसवीं का छात्र पिछले कुछ समय से बेहद शांत हो गया। पहले वह खेलकूद में एक्टिव था, लेकिन प्री-बोर्ड के बाद से उसने दोस्तों से मिलना बंद कर दिया। घर में हर दिन उससे प्रतिशत और रैंक को लेकर सवाल किए जाते थे। पैरेंट्स का इरादा उसे प्रेरित करना था, लेकिन बार-बार तुलना करने से बच्चा दबाव महसूस करने लगा। वह सिरदर्द और पेट दर्द की शिकायत के साथ डॉक्टर के पास पहुंचा, तो सामने आया कि उसे असफल होने का डर सता रहा है। केस 2 : मोबाइल छीनने पर बढ़ी दूरी : बारहवीं की एक छात्रा का पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा था। पैरेंट्स ने सख्ती करते हुए उसका मोबाइल पूरी तरह बंद करवा दिया। इसके बाद वह और अधिक चिड़चिड़ी हो गई और कमरे में अकेले रहने लगी। पढ़ाई के घंटों के बावजूद उसका परिणाम बेहतर नहीं हुआ। बातचीत में सामने आया कि अचानक पाबंदी लगाने से उसका तनाव बढ़ गया था। केस 3 : पैरेंट्स के बीच बहस का असर बच्चे पर : एक परिवार में बोर्ड परीक्षा को लेकर माता-पिता के बीच ही मतभेद बढ़ गए। पिता सख्ती के पक्ष में थे, जबकि मां बच्चे को आराम और ब्रेक देने की बात करती थीं। रोजाना की बहस का असर सीधे बच्चे पर पड़ा और उसने पढ़ाई से दूरी बनानी शुरू कर दी। काउंसलर ने समझाया कि आपसी टकराव बच्चे के आत्मविश्वास को प्रभावित कर रहा है।


