चांदपोल बाजार स्थित बाबा हरिश्चंद्र मार्ग पर अवैध रूप से संचालित रेस्टोरेंट्स के मामले में नगर निगम की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की शिकायत के बाद निगम का दस्ता मौके पर पहुंचा, लेकिन 11 में से 10 अवैध संचालकों को छोड़कर केवल उस एक दुकानदार पर कार्रवाई की गई, जिसके पास वैध दस्तावेज और फूड लाइसेंस था। पूर्व मेयर ने निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर बताया था कि उनके निवास के पास करीब 200 मीटर दायरे में 11 रेस्टोरेंट व फूड जोन संचालित हो रहे हैं। इनके पास न पार्किंग व्यवस्था है और न ही सुरक्षा कर्मी, जिससे ग्राहक सड़क पर वाहन खड़े कर देते हैं और दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। शिकायत के साथ फोटो और वीडियो भी संलग्न किए गए थे। पत्र में सभी प्रतिष्ठानों के नाम दर्ज करते हुए उल्लेख किया गया था कि केवल ‘संपत नमकीन भंडार’ के पास ही दुकान के वैध दस्तावेज और फूड लाइसेंस है। 29 जनवरी को निगम का अतिक्रमण दस्ता मौके पर पहुंचा। अन्य संचालकों को पूर्व सूचना मिलने के कारण उन्होंने सड़क से अतिक्रमण हटा लिया, जबकि निगम ने केवल लाइसेंसधारी संपत नमकीन भंडार के टीन-शेड और भट्टी हटाकर कार्रवाई की। घटना के बाद पूर्व मेयर ने निगम कमिश्नर गौरव सैनी को लिखित शिकायत दी, लेकिन सुनवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने पूरे प्रकरण की जानकारी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भेजी है। नियमों के अनुसार फूड लाइसेंस तभी जारी होता है, जब दुकान के स्वामित्व या पट्टे के दस्तावेज उपलब्ध हों। पूर्व मेयर का कहना था कि शेष प्रतिष्ठान बिना वैध दस्तावेज और बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। इनकी भेजी थी सूची “बाबा हरिश्चंद्र मार्ग में अतिक्रमण व फूड लाइसेंस के खिलाफ जो कार्रवाई हुई है, उसकी मुझे जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य शाखा ही बता सकती है।”
-बलबीर चौधरी, उपायुक्त किशनपोल जोन “रिहायशी इलाका होने की वजह से बाबा हरिश्चंद्र मार्ग में अधिकतर लोगों के पास फूड लाइसेंस नहीं है, सभी को नोटिस दिए हैं। विजिलेंस ने कार्रवाई भी की है।”
-डॉ. सोनिया अग्रवाल, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम


