अलवर| मूसी महारानी की छतरी के पास बख्तेश्वर महादेव मंदिर शिव-पार्वती की प्रतिमा दूल्हा-दुल्हन के राजसी वेश में विराजमान है। मंदिर के महंत विजय सारस्वत ने बताया कि वर्ष 1815 में अलवर के राजा बख्तावर सिंह ने पं. रामदयाल सारस्वत के निर्देशानुसार शिव मंदिर का निर्माण कराया। राजा बख्तावर के नाम पर इस मंदिर का नाम बख्तेश्वर महादेव मंदिर रखा गया। मंदिर में भगवान शिव और पार्वती की प्रतिमा दूल्हे-दुल्हन के रूप में राजसी वेश में दोनों पुत्र गणेश व कार्तिकेय के साथ विराजमान है। गणेश जी का वाहन मूषक व कार्तिकेय का वाहन मयूर काले पत्थर का बना है। शिव की प्रतिमा सवा तीन फीट, पार्वती, गणेश जी व कार्तिकेय की प्रतिमा सवा 2 फीट- सवा 2 फीट की हैं। नंदी व शेर की प्रतिमा ढाई-ढाई फीट, मूषक की प्रतिमा 2 फीट और मयूर की प्रतिमा 3 फीट लंबी और 2 फीट ऊंची हैं। शिव-पार्वती के वैवाहिक स्वरूप की प्रतिमाएं होने के कारण इस मंदिर की विशेष पहचान है।


